लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा “वोट चोरी” के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद चुनाव आयोग ने अब इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी एक आधिकारिक नोटिस के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने का आरोप राहुल गांधी ने लगाया था, उनकी विस्तृत जांच की गई है। जांच में राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो सकी।
राहुल गांधी ने 7 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि “The foundation of the Constitution is the vote, Vote has been destroyed” उन्होंने उत्तर प्रदेश के मतदाता डेटा में डुप्लीकेट वोटर एंट्री के आरोप लगाए थे और दो व्यक्तियों—आदित्य श्रीवास्तव (FPP6437040) और विशाल सिंह (INB2722288)—के नाम विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में एक से अधिक बार दर्ज होने का दावा किया था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दो मतदाताओं, आदित्य श्रीवास्तव और विशाल सिंह के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने का आरोप लगाया था। नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, आदित्य श्रीवास्तव का नाम चार अलग-अलग जगहों पर मौजूद था। मुंबई के सायन विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र 877 के बूथ संख्या 158 पर, ठाणे के लोकमान्य नगर में भी इसी केंद्र और बूथ संख्या पर, वाराणसी की कैंट विधानसभा के मतदान केंद्र 630 पर और लखनऊ पूर्व विधानसभा के मतदान केंद्र 390 के बूथ संख्या 82 पर। इसी तरह, विशाल सिंह का नाम तीन स्थानों पर दर्ज बताया गया, जिसमें बैंगलोर की महादेवपुरा विधानसभा के मतदान केंद्र 513 और 321 (बूथ संख्या 926 और 894) पर, वाराणसी में और वाराणसी कैंट में बूथ संख्या 82 पर विशाल सिंह का नाम दर्ज होने का दावा किया गया।
हालांकि 7 अगस्त 2025 को आयोग ने जब इन दोनों मतदाताओं के नामों को आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर सत्यापित किया, तो पाया कि आदित्य श्रीवास्तव (FPP6437040) का नाम केवल वाराणसी कैंट विधानसभा के बूथ संख्या 630 पर ही दर्ज है, और विशाल सिंह (INB2722288) का नाम सिर्फ बेंगलुरु की महादेवपुरा विधानसभा के बूथ संख्या 513 पर ही मौजूद है। उत्तर प्रदेश या अन्य किसी स्थान पर इन नामों की उपस्थिति नहीं मिली। आयोग के अनुसार, राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों और आरोपों की पुष्टि जांच में नहीं हो सकी है।
राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए गए ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों पर आयोग ने सख्ती दिखाई है। चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले की जांच करने के लिए राहुल गांधी से हलफनामा देने की मांग की है। चुनाव आयोग ने कहा कि यदि राहुल गांधी को अपने विश्लेषण पर भरोसा है और वे चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सच मानते हैं, तो उन्हें बिना किसी हिचकिचाहट के घोषणा-पत्र (डिक्लरेशन) पर हस्ताक्षर करने चाहिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि राहुल गांधी इस घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करते, तो इसका सीधा अर्थ होगा कि उन्हें अपने ही विश्लेषण और आरोपों पर विश्वास नहीं है।
राहुल गांधी के द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की गहराई से जांच कर चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप फ़र्जी और एकतरफा है, जो निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए खतरा है। आयोग का यह जवाब विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार चुनाव प्रणाली पर सवाल उठा रहा है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या राहुल गांधी आयोग की चुनौती स्वीकार करते हैं और हलफनामा दाखिल करते हैं या नहीं।
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