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Tuesday, February 3, 2026
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बिहार में 65 लाख हटाए गए मतदाताओं की सूची जारी!

राहुल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज साझा करना संभव नहीं है, क्योंकि इससे खासकर महिलाओं की गोपनीयता और गरिमा प्रभावित हो सकती है।

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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग (ECI) ने बिहार के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख मतदाताओं के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं। यह सूची अब सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध है। आयोग ने यह कदम 14 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के महज 56 घंटे के भीतर उठाया।

बिहार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय ने नोटिस जारी कर बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) ने बूथ-स्तरीय एजेंटों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य अधिकारियों की मदद से उन मतदाताओं की सूची तैयार की, जिनके एन्यूमरेशन स्लिप प्राप्त नहीं हुए। आयोग ने यह भी कहा है कि यदि कोई व्यक्ति सूची से असंतुष्ट है तो वह अपना दावा आधार कार्ड की प्रति के साथ प्रस्तुत कर सकता है।

पिछले हफ्ते शीर्ष अदालत ने बिहार मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए ECI को आदेश दिया था कि हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण दोनों सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही निर्देश दिया गया कि बूथवार हटाए गए मतदाताओं की सूची जिला निर्वाचन कार्यालयों पर प्रदर्शित की जाए और जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह सूची सोशल मीडिया पर भी साझा करनी होगी। इसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी बिहार वेबसाइट पर एक नया लिंक सक्रिय कर दिया है, जिससे लोग आसानी से अपना नाम जांच सकें।

इसी बीच, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के “वोट चोरी” आरोपों पर भी चुनाव आयोग ने कड़ा रुख दिखाया। रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ग्यानेश कुमार ने कहा कि राहुल गांधी ने मतदाताओं की तस्वीरें उनकी सहमति के बिना सार्वजनिक कीं, जो आपत्तिजनक है। उन्होंने राहुल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज साझा करना संभव नहीं है, क्योंकि इससे खासकर महिलाओं की गोपनीयता और गरिमा प्रभावित हो सकती है।

आयोग ने भरोसा दिलाया कि किसी भी गड़बड़ी की शिकायत की संपूर्ण जांच की जाएगी, लेकिन मतदाताओं की निजता और सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा। बिहार की मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव और उसके इर्द-गिर्द उठे राजनीतिक विवाद से राज्य की चुनावी सियासत में हलचल तेज हो गई है।

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