इस मिशन का उद्देश्य युवाओं को घरेलू और विदेशी रोजगार के लिए तैयार करना, स्किल गैप को दूर करना, करियर काउंसलिंग देना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें वैश्विक मांग के अनुरूप बनाना है।
प्रदेश सरकार को जापान, जर्मनी, क्रोएशिया और यूएई से नर्सों, ड्राइवरों और निर्माण श्रमिकों की मांग मिली है। इन नौकरियों में 1.50 लाख रुपये तक का वेतन मिलने की संभावना है। इसके साथ ही खाड़ी देशों से भी बड़ी संख्या में रिक्तियां आने की उम्मीद है।
सेवायोजन विभाग अब तक 10,830 रोजगार मेलों का आयोजन कर चुका है, जिनसे 13.64 लाख से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी मिली। इसी के तहत 5,978 श्रमिकों को इज़रायल भेजा गया है, जबकि 1,383 और श्रमिकों को भेजने की प्रक्रिया जारी है। अनुमान है कि इज़रायल में कार्यरत श्रमिकों से प्रदेश को लगभग 1,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी।
स्थानीय स्तर पर ‘सेवामित्र योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत 52,000 से अधिक कामगार ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकृत हैं और घर बैठे सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
योगी सरकार का मानना है कि युवाओं को रोजगार के साथ सही दिशा देना भी आवश्यक है, इसलिए 24,000 से अधिक करियर काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह पहल उत्तर प्रदेश को श्रम और प्रतिभा का निर्यातक राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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