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बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, चार बच्चों की मौत; मृतक 656 पहुंचे!

इसके साथ ही देश में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए खसरे से मौतों की संख्या 93 और संदिग्ध मौतों की संख्या 563 पहुंच गई है।

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बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक बीते 24 घंटों में खसरे और खसरे जैसे लक्षणों के कारण चार और बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद देश में इस बीमारी से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 656 हो गई है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने इन चार मौतों में से एक को प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए खसरे का मामला बताया है, जबकि तीन मौतों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। इसके साथ ही देश में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए खसरे से मौतों की संख्या 93 और संदिग्ध मौतों की संख्या 563 पहुंच गई है।

पिछले 24 घंटों के दौरान 972 नए संदिग्ध खसरे के मामले भी सामने आए हैं, जिससे देश में संदिग्ध मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 86,923 हो गई है। इसी अवधि में 64 नए लैब-पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जिसके बाद पुष्टि किए गए संक्रमितों की कुल संख्या 10,387 हो गई है।

डीजीएचएस के अनुसार, 15 मार्च से अब तक 71,467 संदिग्ध मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 67,878 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

इस बीच, बांग्लादेश में सरकार के यह दावा करने के बावजूद कि लक्षित बच्चों में टीकाकरण कवरेज 100 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, देश में खसरे का प्रकोप थमता नजर नहीं आ रहा है। इससे टीकाकरण विशेषज्ञों ने वैक्सीन की प्रभावशीलता और टीकाकरण कवरेज में मौजूद खामियों को लेकर चिंता जताई है।

देशव्यापी आपातकालीन टीकाकरण अभियान समाप्त हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद देशभर के अस्पतालों में रोजाना 1,000 से अधिक बच्चों को खसरे या खसरे जैसे लक्षणों के साथ भर्ती किया जा रहा है और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

सरकार के रोग नियंत्रण विभाग के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद ने कहा कि यदि टीकाकरण कवरेज वास्तव में 90 प्रतिशत से अधिक हो गई होती, तो संक्रमण के मामलों में काफी तेजी से गिरावट आनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि कई बार कागजों पर टीकाकरण 100 प्रतिशत दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता में हजारों बच्चे अब भी टीके से वंचित रह जाते हैं।

इससे पहले पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने भी खुलासा किया था कि उसने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली तत्कालीन अंतरिम सरकार को कई बार लिखित पत्रों और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ बैठकों के माध्यम से वैक्सीन की कमी को लेकर आगाह किया था।

बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने ढाका में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया था कि वर्ष 2024 से ही सरकार को चेतावनी दी जा रही थी कि वैक्सीन की कमी भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि 2024 से 2026 के बीच यूनिसेफ ने कई पत्र भेजे और 10 अलग-अलग बैठकों में इस मुद्दे को उठाया, लेकिन समय पर वैक्सीन की खरीद के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।

राना के अनुसार, यूनिसेफ के उप कार्यकारी निदेशक टेड चैबन ने भी पिछले वर्ष अगस्त में बांग्लादेश यात्रा के दौरान विदेश मंत्रालय के साथ बैठक में वैक्सीन की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।

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