नवंबर 2025 में राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुए भयानक कार बम ब्लास्ट की जांच अब इंटरनेशनल लेवल पर एक नई दिशा ले चुकी है। यूनाइटेड नेशंस 1267 मॉनिटरिंग कमेटी की लेटेस्ट रिपोर्ट ने इस हमले को आतंकी संगठन ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) से जोड़ा है, जो अल-कायदा से जुड़ा है। 10 अगस्त, 2026 को जारी इस रिपोर्ट में अल-कायदा के साउथ एशिया में अपना नेटवर्क बढ़ाने की कोशिशों पर भी चिंता जताई गई है। खास तौर पर, सिक्योरिटी एजेंसियों ने बांग्लादेश में ऑपरेशनल सेल बनाने की चालों पर ध्यान दिलाया है।
यूनाइटेड नेशंस के मुताबिक, अल-कायदा से जुड़ी गतिविधियां सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं। इस बात पर चिंता जताई गई है कि यह संगठन साउथ एशिया के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी गतिविधियों के लिए अपने नेटवर्क, रिक्रूटमेंट और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा कोई नेटवर्क बांग्लादेश में एक्टिव हो जाता है, तो यह भारत की सिक्योरिटी के लिए भी एक नई चुनौती बन सकता है, खासकर रेडिकल प्रोपेगैंडा, युवाओं की भर्ती, फंडिंग और भारत की पूर्वी सीमा पर लॉजिस्टिक नेटवर्क बढ़ाने के मामले में।
10 नवंबर, 2025 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास एक गाड़ी में बड़ा धमाका हुआ। इस घटना में कई लोग मारे गए और कई घायल हुए। जांच में पता चला कि हमला एक गाड़ी में विस्फोटकों का इस्तेमाल करके किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने जांच शुरू की। फिर जांच को धमाके के लिए इस्तेमाल की गई गाड़ी से बढ़ाकर आरोपियों के कॉन्टैक्ट्स के नेटवर्क, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और टेररिस्ट नेटवर्क तक बढ़ाया गया।
इस जांच में मुख्य आरोपी के तौर पर डॉ. उमर उन नबी का नाम सामने आया। वह पुलवामा का रहने वाला था और फरीदाबाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहा था। धमाके में उसकी मौत हो गई और DNA टेस्टिंग से उसकी पहचान कन्फर्म हुई।
मई 2026 में, NIA ने इस मामले में 7,500 पेज की चार्जशीट फाइल की। इसमें 10 आरोपियों के नाम हैं और जांच एजेंसी के अनुसार, ये आरोपी आतंकवादी संगठन अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH) से जुड़े थे। AGuH अल-कायदा से जुड़ा हुआ है।
इस केस का एक और अहम पहलू मेडिकल फील्ड में बहुत पढ़े-लिखे लोगों का कथित तौर पर शामिल होना है। NIA की जांच के मुताबिक, कट्टरपंथी विचारधारा के असर में आए कुछ डॉक्टरों पर इस आतंकवादी नेटवर्क की मदद करने का आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार कश्मीर, दिल्ली और फरीदाबाद तक पहुंच गए थे। जांच में पता चला है कि बहुत पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोगों के ज़रिए नेटवर्क को बढ़ाने की कोशिश की गई थी।
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