अशोका यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सोमवार (25 अगस्त)को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के ट्रायल पर रोक लगा दी है। आदेश के अनुसार, निचली अदालत न तो चार्जशीट पर संज्ञान लेगी और न ही आरोप तय करेगी, जब तक कि अगली सुनवाई नहीं हो जाती।
प्रोफेसर अली खान को इस साल मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उन्होंने नियमित प्रेस ब्रीफिंग करने वाली सेना की महिला अधिकारियों कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। हरियाणा पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें से एक मामले में पुलिस पहले ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है, जबकि दूसरे मामले में चार्जशीट प्रस्तुत की गई है। सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा आदेश इसी दूसरे मामले से संबंधित है।
पहला केस सोनीपत जिले के जटेड़ी गांव के सरपंच की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196, 197, 152 और 299 के तहत मामला बनाया गया। दूसरा केस हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया की शिकायत पर दर्ज किया गया था। इसमें सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी और आयोग के नोटिस की अवहेलना का आरोप था। इस मामले में बीएनएस की धारा 353, 79, 152 और 169(1) के तहत कार्रवाई की गई।
याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पहले भी प्रोफेसर अली खान को अंतरिम जमानत प्रदान की थी। अब कोर्ट ने साफ किया है कि ट्रायल पर रोक का आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा। आदेश से अली खान को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई तक टिका हुआ है।
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