बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट बंटवारे की बातचीत अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और जेडीयू के बीच लगभग सहमति बन चुकी है कि दोनों बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से भाजपा और जेडीयू, दोनों लगभग 100-105 सीटें लड़ सकते हैं। यानी गठबंधन की दो सबसे बड़ी पार्टियों में इस बार बराबरी रहेगी।
अगर 2020 के चुनाव में जेडीयू ने 115 सीटों पर और भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस समय भाजपा ज्यादा मजबूत साबित हुई थी, क्योंकि उसे 74 सीटें मिलीं जबकि जेडीयू सिर्फ 43 पर सिमट गई।
इस बार जेडीयू 100 से कम सीटों पर लड़ने के मूड में नहीं है। जेडीयू का मानना है कि पिछली बार उसे नुकसान इसलिए हुआ क्योंकि चिराग पासवान की पार्टी ने उसके खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए थे। ‘नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है ”पिछली बार जेडीयू का खराब प्रदर्शन बड़े पैमाने पर इसलिए हुआ क्योंकि LJP ने उसके खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे।
बता दें कि यह पार्टी अभी भी बिहार में लगभग 10% वोट शेयर रखती है, खासकर अत्यंत पिछड़े वर्ग (EBCs) में, और इसका भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। चुनावों में यह अभियान नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है, जिसका मकसद उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाना है।
जेडीयू के भाजपा से कम सीटों पर चुनाव लड़ने का कोई सवाल ही नहीं है, हालांकि सहयोगियों को संतुष्ट करने के लिए कुछ मामूली बदलाव किए जा सकते हैं।” महागठबंधन में लौटेगा JDU? पप्पू यादव का चुनाव से पहले बड़ा खुलासा क्या BJP नीतीश को नहीं बनाएगी CM? महागठबंधन में लौटेगा JDU? पप्पू यादव का चुनाव से पहले बड़ा खुलासा चिराग पासवान की पार्टी LJP (RV) को कितनी मिलेगी सीटें? सबसे बड़ी अड़चन चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को लेकर है।
LJP (RV) ने 40 सीटों की मांग की है। लेकिन भाजपा और जेडीयू सिर्फ 20 सीटें देने पर विचार कर रहे हैं। LJP (RV) की ताकत यह है कि उसने 2024 लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया था-उसने अपनी लड़ी सभी 5 सीटें जीतीं और करीब 6% वोट शेयर हासिल किया। इसके अलावा, उसने 29 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई थी।
हालांकि, जेडीयू का तर्क है कि लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ा गया था, जबकि विधानसभा चुनाव में स्थानीय समीकरण ज्यादा असर डालते हैं। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “वे (LJP (RV) 40 सीटों की मांग कर रहे हैं, जो उनके दायरे से बहुत अधिक है। हां, उनके पास पांच सांसद हैं और इसका सम्मान किया जाएगा, लेकिन यथार्थवादी संख्या करीब 20 सीटों के आसपास है। हमें कुशवाहा और मांझी को भी जगह देनी है और कुछ अप्रत्याशित उम्मीदवार भी हो सकते हैं।”
जीतन राम मांझी की हम (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को भी कुछ सीटें मिलेंगी। अगर मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) महागठबंधन छोड़कर NDA में आती है तो सीटों का समीकरण और बदल सकता है।
हालांकि 2020 विधानसभा चुनाव में उन्होंने 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सिर्फ एक सीट (मटिहानी) जीत पाए और कुल वोट शेयर 5.66% ही रहा। फिर भी, उनके उम्मीदवारों ने कई सीटों पर इतना वोट काटा कि जेडीयू को हार झेलनी पड़ी। उदाहरण के लिए, 27 सीटों पर जेडीयू दूसरे नंबर पर रहा और वहां LJP (RV) के वोट जीत-हार के अंतर से ज्यादा थे।
भाजपा और जेडीयू लगभग बराबर सीटें लड़ेंगे। चिराग पासवान को 20 सीटों के आसपास ही मिलेंगी, भले ही उनकी मांग 40 की हो। छोटे दलों को उनकी क्षमता और जनाधार के हिसाब से एडजस्ट किया जाएगा। कुल मिलाकर, इस बार NDA में जेडीयू और भाजपा बराबर सीटों पर लड़ेंगे और चिराग पासवान की पार्टी को सीटें आधी मिलने की पूरी संभावना है।
यह भी पढ़ें-



