अमेरिका के सबसे उन्नत युद्धक विमानों – F-16 फाइटिंग फाल्कन और F-35 लाइटनिंग-II – से जुड़े हालिया हादसों ने न सिर्फ नाटो (NATO) बल्कि अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान को भी असहज स्थिति में डाल दिया है। इन दुर्घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिकी जेट्स वाकई उतने भरोसेमंद और दमदार हैं, जितना उनका दावा किया जाता रहा है।
ताजा मामला 28 अगस्त को सामने आया, जब पोलैंड में एक F-16 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में देश के एक माहिर पायलट की मौत हो गई। विशेषज्ञों ने कहा कि यह घटना प्लेटफॉर्म की उम्र को उजागर करती है। F-16 पहली बार 1974 में उड़ा था और 1978 से सेवा में है,यानी इसका डिजाइन लगभग 50 साल पुराना है। बावजूद इसके, नाटो देश इन्हें यूक्रेन भेजने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि रूस का मुकाबला किया जा सके।
लेकिन समस्या सिर्फ पुराने F-16 तक सीमित नहीं है। अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ मल्टी-रोल फाइटर और नाटो का अगला फ्लैगशिप, F-35, भी लगातार तकनीकी खामियों और हादसों से जूझ रहा है।
बीते महीनें एक ब्रिटिश F-35B आपात लैंडिंग के बाद हाइड्रोलिक और पावर फेलियर का शिकार हो गया। यह जेट एक महीने से ज्यादा समय तक भारतीय एयरबेस पर खड़ा रहा, जिसकी सुरक्षा के लिए हथियारबंद गार्ड्स तैनात करने पड़े।इसके अलावा अमेरिकी वायुसेना का F-35A लैंडिंग गियर खराबी से जूझते हुए क्रैश हो गया। पायलट ने अंतिम क्षणों में इजेक्ट किया। जांच में पता चला कि हाइड्रोलिक फ्लूड में पानी की मिलावट जम गई, जिससे विमान ने समझ लिया कि वह पहले से ही जमीन पर है।
ये घटनाएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब अमेरिका इन विमानों की नाटो सहयोगियों और वैश्विक बाजारों में आक्रामक बिक्री कर रहा है। ट्रंप प्रशासन इसे अपने रक्षा निर्यात एजेंडे का अहम हिस्सा बता रहा है। F-35 प्रोग्राम की लागत एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है। 2015 में सेवा में आए इस फाइटर जेट को तकनीकी तौर पर अत्याधुनिक बताया जाता है, लेकिन यह लगातार ग्लिच, ग्राउंडिंग ऑर्डर और हाई-प्रोफाइल असफलताओं का सामना कर रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि F-16 और F-35 हादसे ऐसे समय में हुए हैं जब पश्चिमी देश इन्हें यूक्रेन में तैनात करने जा रहे हैं। पोलैंड में हुए F-16 क्रैश ने नाटो के आत्मविश्वास को हिला दिया है। इन घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर यह बहस तेज कर दी है कि क्या अमेरिकी ‘F-सीरीज़’ लड़ाकू विमान वास्तव में उतने ही भरोसेमंद हैं जितना उनका प्रचार किया जाता है—या फिर यह ‘ओवरहाइप्ड टेक्नोलॉजी’ है जो जमीनी हकीकत में बार-बार नाकाम हो रही है।
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