अफगानिस्तान एक बार फिर भीषण प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। पूर्वी अफगानिस्तान के कई प्रांतों में आए शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचा दी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक कम से कम 610 लोगों की मौत हो चुकी है और 1300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि राहत और बचाव दल मलबे से शव और घायलों को निकाल रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार भूकंप की तीव्रता 6.4 मापी गई और इसका केंद्र खोस्त तथा पक्तिका प्रांत के पास था। सबसे ज्यादा नुकसान पक्तिका प्रांत के गियान और बरमल जिलों में हुआ है, जहां कई गांव पूरी तरह धराशायी हो गए हैं। कच्चे मकान और मिट्टी के घर ताश के पत्तों की तरह गिर पड़े। कई जगहों पर दर्जनों परिवार मलबे के नीचे दब गए।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मरने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण इलाज में दिक्कतें आ रही हैं। कई अस्पतालों में बेड खाली नहीं हैं और घायलों को खुले मैदानों में प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है।
तालिबान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है। बचाव कार्यों में सेना के जवान और स्थानीय लोग जुटे हैं, लेकिन दूरदराज इलाकों में पहुंचना बेहद कठिन साबित हो रहा है। बारिश और भूस्खलन की वजह से राहत कार्य प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र और कई मानवीय संस्थाओं ने तत्काल सहायता भेजने का आश्वासन दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह भूकंप अफगानिस्तान के पिछले दो दशकों में आया सबसे घातक भूकंप साबित हो सकता है। हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और अब उनके सामने भोजन, पानी और आश्रय की गंभीर चुनौती है। प्रभावित इलाकों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और राहत शिविर बनाए जा रहे हैं।
यह त्रासदी पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे अफगानिस्तान के लिए गहरी मानवीय चुनौती बनकर सामने आई है।
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