आम जनता को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों को पूरी तरह से GST से मुक्त कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह निर्णय जीएसटी काउंसिल की सर्वसम्मति से लिया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा, “पिछले साल संसद में विपक्ष ने सवाल उठाया था कि आप बीमा प्रीमियम पर टैक्स क्यों लगाना चाहते हैं? विस्तृत अध्ययन और हितधारकों से चर्चा के बाद हमने यह कदम उठाया है ताकि बीमा लेने वाले परिवारों को राहत मिले। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे टैक्स छूट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।”
अब तक स्वास्थ्य और बीमा उत्पादों पर 18% GST लागू होता था, जिसे शून्य कर दिया गया है। इससे बीमा प्रीमियम सीधे तौर पर कम होगा और अधिक परिवार बीमा योजनाएं खरीदने के लिए प्रेरित होंगे।
केंद्र सरकार ने जीएसटी ढांचे को सरल बनाते हुए मौजूदा चार स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) की जगह दो स्लैब 5% और 18% लागू करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, लक्जरी और “सिन गुड्स” (जैसे शराब, तंबाकू, हाई-एंड गाड़ियां) के लिए 40% का विशेष स्लैब प्रस्तावित किया गया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस की घोषणा के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने टैक्स प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने का वादा किया था।
सरकार को होगा राजस्व नुकसान
वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर लगे GST से कुल 16,398 करोड़ रुपये की वसूली की थी। इसमें से 8,135 करोड़ रुपये जीवन बीमा और 8,263 करोड़ रुपये स्वास्थ्य बीमा से आए थे। इसके अलावा, 2,045 करोड़ रुपये री-इंश्योरेंस से प्राप्त हुए। अब यह राजस्व शून्य से सरकार को सालाना लगभग 1.2-1.4 अरब डॉलर का घाटा हो सकता है।
आम जनता और कंपनियों पर असर
HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, इस छूट से स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम करीब 15% तक घट सकता है। हालांकि, बीमा कंपनियों को 3-6% तक का वित्तीय असर झेलना पड़ सकता है, क्योंकि रीप्राइसिंग की प्रक्रिया में 12 से 18 महीने का समय लगेगा।
इसके अलावा, थर्मामीटर, मेडिकल-ग्रेड ऑक्सीजन, डायग्नोस्टिक किट्स, रिएजेंट्स, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स और चश्मे जैसे मेडिकल उत्पादों पर GST घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे मरीजों और स्वास्थ्य प्रदाताओं दोनों को फायदा होगा। इस कदम से बीमा निकालना अधिक सुलभ बन गया है। इससे वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा और मध्यम वर्गीय परिवारों की अप्रत्याशित स्वास्थ्य खर्चों से सुरक्षा होगी।
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