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होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी हमलों के बाद कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट 93 डॉलर प्रति बैरल के पार

अमेरिका-ईरान तनाव और घटते अमेरिकी भंडार के बीच वैश्विक बाजारों पर बढ़ा दबाव

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच बुधवार (10 जून)को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगभग एक प्रतिशत तक चढ़ गईं।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 93.26 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल भी करीब एक प्रतिशत की बढ़त के साथ 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण मध्य पूर्व से होने वाले तेल निर्यात पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, हालिया सैन्य कार्रवाई में ईरान के वायु रक्षा तंत्र, निगरानी रडार और ग्राउंड कंट्रोल सुविधाओं को निशाना बनाया गया। बताया गया कि यह अभियान उस घटना के बाद चलाया गया, जिसमें क्षेत्र में एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

हालांकि, ईरान ने इस घटना में किसी भी प्रकार की भूमिका से इनकार किया है और कहा है कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना एक आकस्मिक घटना थी। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को जन्म दिया है, जबकि बाजार पहले क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद कर रहे थे।

तेल की कीमतों को अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में लगातार आठवें सप्ताह आई गिरावट से भी समर्थन मिला। कम भंडार को आमतौर पर मजबूत मांग या सीमित आपूर्ति का संकेत माना जाता है, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बनता है।

इसी बीच, रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इज़राइल लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखता है तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जहां जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक गिर गए। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग चार प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

अमेरिकी बाजारों में भी मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई। नैस्डैक कंपोजिट 0.97 प्रतिशत और एसएंडपी 500 सूचकांक 0.26 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ।

हालांकि, वैश्विक बाजारों में दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजारों ने मजबूती दिखाई। बुधवार के शुरुआती कारोबार में प्रमुख भारतीय सूचकांक करीब 0.5 प्रतिशत तक बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे घरेलू निवेशकों के सकारात्मक रुख का संकेत मिला।

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