महाराष्ट्र की महत्वाकांक्षी वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ परियोजना की लागत बढ़कर करीब ₹98,000 करोड़ तक पहुंच गई है। इस परियोजना के जरिए विदर्भ और मराठवाड़ा के जलसंकट को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार (8 सितंबर) को संकेत दिया कि राज्य सरकार इस परियोजना को तेजी देने के लिए केंद्र सरकार से लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा वहन करने का आग्रह करेगी।
यह परियोजना मानसून के दौरान गोसीखुर्द जलाशय से 62.57 टीएमसी पानी उठाकर 388 किलोमीटर लंबे लिंकिंग कैनाल के जरिए नलगंगा परियोजना तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। इससे भंडारा, नागपुर, वर्धा, अमरावती, यवतमाल, अकोला, वाशीम और बुलढाणा जिलों में लगभग 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा।
फडणवीस ने 8 सितंबर को सह्याद्री गेस्ट हाउस में हुई समीक्षा बैठक में कहा कि परियोजना को समयबद्ध योजना के तहत तेजी से आगे बढ़ाया जाए। बैठक में जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन, जलसंपदा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कपूर, योजना विभाग के प्रधान सचिव सौरभ विजय, जलसंपदा विभाग के सचिव संजय बेलसरे, विदर्भ सिंचन विकास निगम के कार्यकारी निदेशक राजेश सोनटक्के, गोसीखुर्द परियोजना के मुख्य अभियंता संजय गवली समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय तकनीकी सलाहकार समिति को निर्देश दिया कि 15 अक्टूबर तक परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) पेश की जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक धन राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी, लेकिन साथ ही केंद्र सरकार से भी कम से कम 25 प्रतिशत सहायता दिलाने की दिशा में पत्राचार और फॉलो-अप किया जाएगा।
परियोजना के पहले चरण के तहत गोसीखुर्द से लोअर वर्धा तक का सर्वेक्षण कार्य समय पर पूरा हो चुका है। फडणवीस ने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी मिलते ही पहला चरण तत्काल शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना से न केवल कृषि क्षेत्र को राहत मिलेगी बल्कि विदर्भ और मराठवाड़ा के लंबे समय से चले आ रहे जल संकट को दूर करने में भी मदद मिलेगी।
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