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स्पेन और इज़रायल के बीच बढ़ा तनाव, इजरायल ने लगाए यात्रा प्रतिबंध!

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इज़रायल-हमास युद्ध के 23वें महीने में स्पेन और इज़रायल के बीच कूटनीतिक तनाव और गहराता जा रहा है। सोमवार (9 सितंबर) को स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने इज़रायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर बेहद कड़े शब्दों में बयान दिया और कई नए कदमों की घोषणा की। इसके जवाब में इज़रायल ने स्पेन की सरकार के दो मंत्रियों पर देश में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया।

स्पैनिश प्रधानमंत्री सांचेज़ ने कहा, “यह आत्मरक्षा नहीं, यह हमला भी नहीं, बल्कि एक निहत्थी आबादी का संहार है। यह मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे रोकने में विफल हो रहा है।”

स्पेन के नए कदम

प्रधानमंत्री ने संसद में घोषणा की कि उनकी सरकार इज़रायल पर दबाव बढ़ाने के लिए कई उपाय करेगी। इज़रायल के लिए हथियारों का निर्यात पूरी तरह रोकने का औपचारिक निर्णय (जो अक्टूबर 2023 से अनौपचारिक रूप से लागू है) लिया है। इज़रायली सेना के लिए ईंधन ले जाने वाले जहाजों को स्पेनिश बंदरगाहों से गुजरने पर रोक लगाई गई है। 2026 तक गाज़ा के लिए मानवीय सहायता बढ़ाकर 150 मिलियन यूरो (176 मिलियन डॉलर) की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी UNRWA को अतिरिक्त मदद की जाएगी। इसके साथ फिलिस्तीनी क्षेत्र पर कब्जे हुए जगहों से बने इज़रायली उत्पादों पर प्रतिबंध। गाज़ा में कथित नरसंहार में शामिल लोगों के लिए स्पेन की यात्रा पर रोक। सांचेज़ ने कहा, “हमें पता है कि ये कदम युद्ध अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि इससे नेतन्याहू सरकार पर दबाव बनेगा और फिलिस्तीनियों की पीड़ा कम होगी।”

इज़रायल की कड़ी प्रतिक्रिया

इज़रायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने सांचेज़ के बयान को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि स्पेन की सरकार भ्रष्टाचार के घोटालों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पेनिश कदमों को “यहूदी-विरोधी (antisemitic)” करार दिया। इज़रायल ने घोषणा की कि स्पेन की श्रम मंत्री योलांडा डियाज़ और युवा मंत्री सीरा रेगो को देश में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। दोनों वामपंथी दल सुमार से हैं और पहले भी इज़रायल को नरसंहारक राज्य कह चुके हैं।

स्पेन इजरायल-हमास युद्ध की शुरुआत से ही इज़रायल का मुखर आलोचक रहा है। अक्टूबर 2023 में हमास के हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 बंधक बनाए गए थे, किंतु स्पेन की ओर से इसका तीव्र विरोध नहीं देखा गया। इसके बाद शुरू हुए इज़रायली हमलों में अब तक 64,000 से अधिक हमास समर्थक फिलिस्तीनी नागरिक मारे जा चुके हैं। इसके विरोध में स्पेन अपनी भूमिका लगातार बढ़ाए जा रहा है।

पिछले साल स्पेन ने नॉर्वे और आयरलैंड के साथ मिलकर फिलिस्तीन को मान्यता दी थी और वह पहला यूरोपीय देश बना जिसने संयुक्त राष्ट्र की अदालत में दक्षिण अफ्रीका के इज़रायल पर नरसंहार के आरोपों वाले केस में शामिल होने की अनुमति मांगी।

गिदोन सार ने कहा, “अगर वे इज़रायल के साथ रक्षा सहयोग रोकना चाहते हैं, तो नुकसान किसे होगा? हमें अपनी भूमि की रक्षा के लिए स्पेन की जरूरत नहीं है।”

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