सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि आरएफपी के विभिन्न खंडों में कठोर शर्तें यह सुनिश्चित करने में मदद करेंगी कि केवल तकनीकी रूप से सक्षम और अनुभवी ठेकेदार ही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए पात्र हों।
इस प्रावधान का एक महत्वपूर्ण घटक बोली योग्यता में “समान कार्य” मानदंड का स्पष्टीकरण है जिसे ठेकेदारों द्वारा अकसर बड़े पैमाने की राजमार्ग परियोजनाओं के लिए पात्रता प्राप्त करने के लिए गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है जबकि उनके पास केवल छोटे कार्यों का अनुभव होता है जो पूर्ण राजमार्ग विकास की जटिलता और पैमाने को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।
एनएचएआई ने अब स्पष्ट किया है कि “समान कार्य” केवल पूर्ण हो चुकी राजमार्ग परियोजनाओं को संदर्भित करेगा, जिसमें उस परियोजना के लिए आवश्यक सभी प्रमुख घटक शामिल हों जिसके लिए बोली आमंत्रित की गई है।
मंत्रालय ने आगे कहा कि योग्यता मानदंडों में सुधार करने के अलावा, आरएफपी के स्पष्टीकरण में एचएएम और बीओटी (टोल) परियोजनाओं में ईपीसी ठेकेदारों और ईपीसी परियोजनाओं में उप-ठेकेदारों की अनधिकृत नियुक्ति से जुड़े मुद्दे का भी समाधान करने का प्रयास किया है।
इस तरह की प्रथाएं न केवल कॉन्ट्रैक्ट नियमों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि गुणवत्ता आश्वासन, परियोजना समय-सीमा और नियामक निगरानी के लिए भी जोखिम पैदा करती हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, सुधार का एक अन्य प्रमुख अंग, तीसरे पक्षों से प्राप्त “बोली और निष्पादन प्रतिभूतियों” को प्रस्तुत करने पर प्रतिबंध लगाना है।
आरएफपी के लिए स्पष्टीकरण यह सुनिश्चित करने में मदद करेंगे कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं प्रमाणित तकनीकी और वित्तीय क्षमता वाले ठेकेदारों को सौंपी जाएं, अधिकृत और जवाबदेह संस्थाओं द्वारा निष्पादित की जाएं और बेहतर नियामक व्यवस्था के साथ निगरानी की जाएं।
इन उपायों से बेहतर बुनियादी ढांचा गुणवत्ता, परियोजनाओं का समय पर पूरा होना और सार्वजनिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा जिससे अधिक कुशल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विकास में योगदान मिलेगा।
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