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पाकिस्तान का ट्रम्प को दिया अरब सागर पर ‘पासनी पोर्ट’ बनाने का ऑफर

ईरान के चाबहार के करीब बनेगा नया ‘पासनी बंदरगाह’

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पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ रिश्तों को सुधारने की कवायद में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अरब सागर पर एक रणनीतिक बंदरगाह बनाने और चलाने का प्रस्ताव दिया है। फ़ाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नागरिक पोर्ट बलूचिस्तान के ग्वादर ज़िले के पासनी कस्बे में बनाया जाएगा, जो ईरान के चाबहार पोर्ट के बेहद करीब है, जहाँ भारत निवेश कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ब्लूप्रिंट में अमेरिका को इस पोर्ट पर एक टर्मिनल बनाने और चलाने की अनुमति दी जाएगी ताकि वह बलूचिस्तान में मौजूद क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुँच बना सके। यह इलाका अफगानिस्तान और ईरान की सीमा से सटा हुआ है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब सितंबर में पाकिस्तानी आर्मी चीफ़ जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने व्हाइट हाउस में ट्रम्प से क्लोज़-डोर मीटिंग की थी। बताया गया है कि उस बैठक में शरीफ़ ने अमेरिकी कंपनियों से ऊर्जा और खनन क्षेत्र में निवेश की मांग की थी। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में देखा गया कि जनरल मुनीर ने ट्रम्प को दुर्लभ खनिजों से भरा लकड़ी का डिब्बा भेंट किया था,जो पाकिस्तान की “खनिज संपदा” का प्रतीक बताया गया।

इसी दौरान एक अमेरिकी धातु कंपनी ने पाकिस्तान के साथ 500 मिलियन डॉलर का करार किया है, जिसके तहत रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की संयुक्त खोज की जाएगी। जो बाइडेन प्रशासन के दौरान अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान अब ट्रम्प के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। उसने अमेरिका को बलूचिस्तान के तेल, गैस और खनिज संसाधनों तक पहुंच का प्रस्ताव दिया है।

हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि मुनीर ने पासनी पोर्ट का प्रस्ताव सीधे ट्रम्प से मीटिंग में चर्चा के दौरान रखा या नहीं।
ब्लूप्रिंट में यह जरूर दर्ज है कि पोर्ट का इस्तेमाल किसी सैन्य उद्देश्य या अमेरिकी बेस के तौर पर नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान चाहता है कि अमेरिका इस प्रोजेक्ट के तहत एक रेल नेटवर्क भी फंड करे, जो पासनी को देश के पश्चिमी खनिज क्षेत्रों से जोड़े।

पाकिस्तान ने अमेरिका को यह समझाने की कोशिश की है कि पासनी की रणनीतिक लोकेशन अमेरिका के लिए मध्य एशिया और ईरान के रास्ते व्यापारिक विकल्पों को बढ़ाएगी और अरब सागर में उसका प्रभाव मजबूत करेगी।

गौरतलब है कि पासनी से महज़ 100 किलोमीटर की दूरी पर चीन द्वारा निर्मित और संचालित ग्वादर पोर्ट स्थित है। ऐसे में, अगर अमेरिका इस नए पोर्ट प्रोजेक्ट में शामिल होता है तो पाकिस्तान को बीजिंग और वाशिंगटन दोनों के बीच संतुलन साधना मुश्किल होगा।

भारत इस विकास पर कड़ी नजर रखेगा क्योंकि प्रस्तावित पासनी पोर्ट ईरान के चाबहार पोर्ट से सिर्फ़ 300 किलोमीटर दूर होगा। चाबहार में भारत शहीद बेहेश्ती टर्मिनल का विकास कर रहा है ताकि पाकिस्तान को बाइपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा व्यापारिक मार्ग मिल सके।

भारत और ईरान के बीच 2024 में इस पोर्ट को 10 साल के लिए विकसित और प्रबंधित करने का समझौता हुआ था। अब पाकिस्तान का नया दांव न केवल भारत बल्कि चीन और अमेरिका के त्रिकोणीय समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।

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