बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीट बंटवारे ने राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कई ऐसी सीटें हैं, जिन्हें लेकर भाजपा की तैयारी थी, लेकिन अब वे एलजेपी आर के खाते में चली गई हैं। इसके बावजूद इन सीटों पर बीजेपी के नेताओं को ही उम्मीदवार बनाया गया है, जिससे सहयोगी दलों और राजनीतिक विशेषज्ञों में सवाल उठ रहे हैं।
गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र से एलजेपी आर ने विनिता मेहता को उम्मीदवार बनाया। विनिता नवादा बीजेपी के जिलाध्यक्ष अनिल मेहता की पत्नी हैं और कई सालों से गोविंदपुर में जनसंपर्क कर रही थीं। चिराग पासवान ने बीजेपी जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में उन्हें एलजेपी आर की टिकट दी।
रजौली सीट पर भी स्थिति यही है। यहां बीजेपी से स्थानीय सांसद विवेक ठाकुर का उम्मीदवार विमल राजवंशी हैं, जिन्हें एलजेपी आर ने अपनी टिकट पर उतारा है। एलजेपी आर की 29 सीटों में से 9 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार मैदान में हैं। इन सीटों में गोविंदपुर, रजौली, बख्तियारपुर, मनेर, बोचहा, परवता, चेनारी, बोधगया और बेलसंड शामिल हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, इसके दो प्रमुख कारण हैं, एक चिराग पासवान का महत्व, एलजेपी आर प्रमुख मोदी के राजनीतिक सहयोगी माने जाते हैं और दूसरा एलजेपी आर का राष्ट्रीय महत्व, केंद्र में एनडीए सरकार में यह चौथा बड़ा सहयोगी दल है, जिसके पांच सांसद हैं। इसके अलावा, यह भी माना जा रहा है कि कई सीटों पर एलजेपी आर के पास दमदार उम्मीदवार नहीं थे, इसलिए बीजेपी नेताओं को उम्मीदवार बनाया गया।
अन्य सीटों का बंटवारा और बीजेपी उम्मीदवार
- बख्तियारपुर: भाजपा खुद चुनाव लड़ने की तैयारी में थी। अरूण कुमार को एलजेपी आर की टिकट पर उतारा गया।
- मनेर: भाजपा से चुनाव लड़ रहे जितेंद्र यादव को एलजेपी आर की सीट पर मैदान में उतारा गया।
- बोचहा और चेनारी: बोचहा से बेबी देवी, चेनारी से मुरारी गौतम को एलजेपी आर ने उम्मीदवार बनाया, दोनों भाजपा के सदस्य।
- परवता और बेलसंड: जदयू कोटे की ये सीटें एलजेपी आर को दी गई, लेकिन उम्मीदवार भाजपा के बाबूलाल शौर्य और अमित कुमार बनाए गए।
2020 से तुलना और रणनीति
भाजपा 2020 में 110 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस बार 101 सीटों पर पार्टी खुद चुनाव मैदान में है, लेकिन सहयोगी दलों के खाते में जाने वाली सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की तैनाती ने सहयोगियों में असंतोष और चर्चा पैदा कर दी है।विश्लेषकों का कहना है कि यह रणनीति भाजपा की सुरक्षा और नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश है, ताकि एलजेपी आर के सहयोगी होने के बावजूद पार्टी का प्रभाव बना रहे।
बिहार विधानसभा 2025 में यह सीट बंटवारा और उम्मीदवार चयन की रणनीति चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना रही है।
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