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रिश्वतखोरी करने वाले यूक्रेन के दो मंत्री बर्खास्त

जेलेंस्की ने कहा,“ कोई समझौता नहीं”

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रूस से जारी युद्ध के बीच यूक्रेन में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आने के बाद राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बुधवार (12 नवंबर)को अपनी सरकार के दो मंत्रियों को पद से हटा दिया। न्याय मंत्री हरमन हालुशचेंको और ऊर्जा मंत्री स्वितलाना ग्रिंचुक पर करोड़ों डॉलर के रिश्वतघोटाले में शामिल होने के आरोप हैं। जेलेंस्की ने अपने बयान में कहा, “ऊर्जा क्षेत्र में हर प्रक्रिया में अधिकतम ईमानदारी होनी चाहिए। मैं हर जांच का समर्थन करता हूं, चाहे वह किसी के खिलाफ क्यों न हो। यह हमारा स्पष्ट और अडिग रुख है।” साथ ही जेलेंस्की ने भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

राष्ट्रपति ने अपने पुराने मित्र और व्यापारिक साझेदार टिमुर मिंडिच के खिलाफ भी व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाने की मांग की है, जिन्हें इस रिश्वत योजना का मुख्य आयोजक बताया गया है। जेलेंस्की ने कहा, “अभी पूरा यूक्रेन कठिन दौर से गुजर रहा है बिजली संकट, रूसी हमले और भारी नुकसान। ऐसे समय में ऊर्जा क्षेत्र में भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती।”

यह घोटाला यूक्रेन की राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी (NABU) की 15 महीने लंबी जांच के बाद सामने आया, जो सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी एनरगोएटम (Energoatom) से जुड़ा था। जांच में खुलासा हुआ कि कंपनी के ठेकेदारों से 10–15 प्रतिशत ‘किकबैक’ वसूले जा रहे थे, ताकि उनके भुगतान रोके न जाएं या सप्लायर स्टेटस बरकरार रहे।

जांच में मिंडिच को मुख्य आरोपी बताया गया, जो पहले जेलेंस्की के मीडिया प्रोडक्शन हाउस Kvartal 95 के सह-संस्थापक थे। मामला सार्वजनिक होने के बाद मिंडिच कथित तौर पर देश छोड़कर इज़राइल भाग गए। यूक्रेनी मीडिया का कहना है कि रूस के पूर्ण आक्रमण के बाद से दोनों के बीच संपर्क बहुत कम था।

यह मामला अब जेलेंस्की सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेता जा रहा है। विपक्षी दलों, सैनिकों और भ्रष्टाचार-विरोधी कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति से मांग की है कि वे अपने करीबी सहयोगियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाएं।

आरोपों के दबाव में बुधवार को दोनों मंत्रियों ने राष्ट्रपति के आग्रह पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया, हालांकि उन्होंने किसी भी तरह की गलत कार्रवाई से इनकार किया है। न्याय मंत्री हालुशचेंको ने कहा कि उनका निलंबन उचित कदम है और वे अदालत में अपना पक्ष रखेंगे।

यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र में इस तरह का रिश्वत नेटवर्क ऐसे समय उजागर हुआ है जब देश रूसी हमलों से बुरी तरह जूझ रहा है और जनता बिजली कटौती से परेशान है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला न केवल जेलेंस्की की प्रशासनिक छवि बल्कि युद्धकालीन शासन की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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