छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रविवार (16 नवंबर) को एक घर में आयोजित प्रार्थना सभा के दौरान कथित अवैध धर्मांतरण का मामला सामने आया है। घटना सरकंडा थाना क्षेत्र के चिलहाटी गांव की है, जहाँ एक मकान में कुछ हिंदू महिलाएँ और बच्चे एक क्रिश्चियन प्रार्थना सत्र में शामिल पाए गए। सूचना मिलने पर स्थानीय हिंदू संगठन के सदस्य वहाँ पहुँचे और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सतर्क किया कि उन्हें कथित रूप से लालच देकर धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके बाद पुलिस को मौके पर बुलाया गया, जिसने प्रार्थना सभा को रोक दिया।
हिंदू संगठन के सदस्य कनहैया साहू ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि शांडी मंदिर रोड स्थित एक घर में हिंदू परिवारों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए बहकाया जा रहा है। इस जानकारी के आधार पर उन्होंने स्टेशन हाउस ऑफिसर को लिखित शिकायत दी। शिकायत में पादरी विष्णु कोसारिया, प्रतीक गोयल और अन्य लोगों पर घर में प्रार्थना सभा आयोजित करने और कथित धर्मांतरण गतिविधि चलाने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
संगठन के सदस्यों के अनुसार, जब वे मौके पर पहुँचे, तब घर में प्रार्थना सत्र जारी था। उनका दावा है कि यह प्रार्थना बैठक अवैध रूप से चालायी जा रही थी और इसका उद्देश्य भोले-भाले हिंदुओं को गुमराह कर धर्म परिवर्तन कराना था। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
राज्य में पिछले कुछ महीनों में कथित धार्मिक रूपांतरण के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार, पिछले छह महीनों में सिविल लाइन्स, सरकंडा, कोनी, सकरी, तोरवा, मस्तूरी, सीपत और पचपेडी समेत कई क्षेत्रों में लगभग 38 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। इससे पहले 12 नवंबर को भी सरकंडा और पचपेडी पुलिस थाना क्षेत्रों में दो अलग-अलग धर्मांतरण मामले दर्ज हुए थे।
मामलों में आरोप है कि कई इलाकों में स्थानीय स्तर पर प्रार्थना सभाओं के ज़रिये लोगों को लालच या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। एक मामले में दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के एक ड्राइवर पर वसंत विहार कॉलोनी स्थित एक घर में आयोजित प्रार्थना सभा के दौरान लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया। वहीं पचपेडी क्षेत्र के कुकुर्डी खुर्द गांव में कुछ हिंदू महिलाओं और बच्चों के धर्मांतरण की कोशिश का मामला सामने आया था।
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिले, खासकर बस्तर और नारायणपुर में, ईसाई आबादी में तेज़ी से बढ़ोतरी भी स्थानीय विवादों का कारण बनी है। बताया जाता है कि कई गांवों में मृत्यु के बाद शवों के दफ़नाने को लेकर तनातनी बढ़ी है, जहाँ हिंदू संगठन नए ईसाई धर्मावलंबियों के दफ़न संस्कार का विरोध करते हैं। ऐसी स्थिति में कई स्थानों पर चर्च परिसरों का उपयोग दफ़नाने के लिए किया जा रहा है। मामले की जांच जारी है और स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि दर्ज एफआईआर के आधार पर तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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