राजधानी में दिल्ली के लाल किले के बाहर पहला VBIED (Vehicular-Borne Improvised Explosive Device) हमला हुए भयावह कार ब्लास्ट में एक बड़ा मोड़ आया है। NDTV द्वारा खुफिया सूत्रों के हवाले से दी रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कम से कम 10 लोग, जिनमें तीन कश्मीरी भी शामिल हैं, रहस्यमय तरीके से लापता हो गए हैं। इन सभी के मोबाइल फ़ोन बंद हैं, और उनका कोई पता नहीं चल रहा।
सूत्र मान रहे हैं कि यह यूनिवर्सिटी संभवतः रेड फ़ोर्ट ब्लास्ट मॉड्यूल का ‘ग्राउंड ज़ीरो’ हो सकती है। इन लापता लोगों का खुलासा जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस की एक संयुक्त कार्रवाई के बाद हुआ। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती इनपुट्स इन 10 लोगों के ‘टेरर डॉक्टर’ मॉड्यूल से जुड़े होने की संभावना जताते हैं, उसी मॉड्यूल ने अमोनियम नाइट्रेट–फ्यूल ऑयल से भरी ह्युंडई i20 कार को विस्फोटक बनाकर 16वीं सदी के ऐतिहासिक लाल किले के बाहर उड़ाया था।
इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी, और कार चला रहा मुख्य आरोपी डॉ. उमर मोहम्मद भी ब्लास्ट में मारा गया। बुधवार (19 नवंबर) को सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान-स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद इस हमले के पीछे होने की सबसे अधिक संभावना है। यही नहीं, संगठन ने कथित रूप से फिदायीन हमलों के लिए चंदा मांगना शुरू कर दिया है—जिसमें करीब 20,000 पाकिस्तानी रुपये की मांग बताई जा रही है।
इनपुट्स के अनुसार, फंड-रेज़िंग के लिए डिजिटल माध्यमों सादा पे जैसे पाकिस्तान के ऐप का इस्तेमाल किया गया। जांच यह भी इशारा करती है कि जैश एक महिला-नेतृत्व वाले हमले की योजना भी बना रहा था।
जैश का एक महिला विंग पहले से सक्रिय है, जिसका नेतृत्व संगठन प्रमुख मसूद अज़हर की बहन सादिया करती है। यही विंग जमात उल-मुमिनात ऑपरेशन सिंदूर में जैश के ढांचों के ध्वस्त होने के बाद अधिक आक्रामक हो गई। इसी यूनिट की एक सदस्य मानी जा रही डॉ. शाहिना सईद, जिसका कोडनेम कथित रूप से “मैडम सर्जन” था, उसको इस पूरे मॉड्यूल के वित्तीय संचालन से जोड़ा गया है। वह रेड फ़ोर्ट ब्लास्ट की प्रमुख संदिग्धों में से एक है।
इस मामले में अब तक 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें अल-फलाह मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टर भी शामिल हैं। मंगलवार को यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को भी गिरफ्तार किया गया। उन्हें ईडी ने टेरर फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में हिरासत में लिया है।
लापता 10 लोगों की खोज तेज कर दी गई है, क्योंकि उनके इस मॉड्यूल से जुड़े होने की संभावना जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। एजेंसियां यूनिवर्सिटी के भीतर संभावित नेटवर्क, फंडिंग चैनल और भर्ती तंत्र के बारे में गहराई से जांच कर रही हैं।
रेड फ़ोर्ट VBIED हमले ने सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है और अब जांच तेजी से यह सामने लाने की कोशिश कर रही है कि भारत में इस तरह के हाई-इम्पैक्ट आतंकी मॉड्यूल कैसे बन रहे हैं, कौन उन्हें फंड कर रहा है और उनका संचालन कहां बैठकर किया जा रहा है।
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