जामिया इस्लामिया इशाअतुल उलूम (JIIU) ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच अब कई राज्यों में फैल गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए ट्रस्ट द्वारा विदेशी चंदे, सरकारी अनुदानों और घरेलू दान को कथित रूप से अघोषित और अपंजीकृत संस्थानों में भेजे जाने की संभावना की गहन जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि ट्रस्ट ने फंड्स को अपने घोषित ढांचे से हटाकर एक समानांतर नेटवर्क को पोषित करने के लिए इस्तेमाल किया।
ED के अनुसार, 2014–15 से 2023–24 के बीच ट्रस्ट ने लगभग ₹406 करोड़ विदेशी चंदे प्राप्त किए। ये फंड प्रमुख रूप से कुवैत, बोत्सवाना, UK, मॉरीशस, स्विट्जरलैंड, सेशेल्स और पनामा से आए थे। इसके अलावा ट्रस्ट को घरेलू NGOs, धार्मिक संगठनों और निजी दाताओं से भी बड़ी मात्रा में धनराशि मिली।
जांच अधिकारियों ने बताया कि बैंक खातों से मिले डेटा में एक समान पैटर्न दिखा। फंड मुख्य खातों में जमा हुए और बाद में छोटे, संबद्ध या अघोषित संस्थानों में ट्रांसफर कर दिए गए। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में स्थित मदरसें, मकतब, कल्याण केंद्र और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं।
ED की जांच में हजारों लेन-देन ट्रेल्स और कई ऐसे बैंक खाते सामने आए हैं जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क फंड्स के अंतिम उपयोग को छिपाने के लिए लेयरिंग तकनीक का इस्तेमाल करता हुआ प्रतीत होता है। एजेंसी यह भी जांच रही है कि क्या म्यूल अकाउंट्स, एस्क्रो चैनल और सेकेंडरी रूट्स के माध्यम से विदेशी धन को छिपाकर आगे भेजा गया। इन खातों की “डीप-डाइव स्क्रूटिनी” जारी है।
स्रोतों ने बताया कि JIIU ट्रस्ट कई जमीयत उलेमा-ए-हिंद (JUH)-संबंधित मदरसों और मस्जिदों के लिए छाते के समान काम करता था। इनमें से कई छोटी संस्थाएं FCRA पंजीकरण नहीं रखती थीं और स्वतंत्र रूप से विदेशी चंदा जुटाने में सक्षम नहीं थीं। ED को संदेह है कि ट्रस्ट ने इन संस्थाओं को साइलेंट फंडिंग के रूप में विदेशी धन पहुंचाया, जो नियमों के विरुद्ध है।
अधिकारियों ने कहा कि यह मॉडल फंड्स को केंद्रीय स्तर पर प्राप्त कर स्थानीय संस्थानों में वितरित करने का तरीका था, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर हो गई।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ फंड्स ऐसे संगठनों तक पहुंचे जो सामुदायिक मामलों, राहत कार्यों और उन व्यक्तियों की कानूनी सहायता में शामिल थे जो दंगों या सुरक्षा मामलों से जुड़े मामलों में अभियुक्त रहे हैं। हालांकि ED ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि ये व्यय FCRA का उल्लंघन हैं या नहीं, लेकिन वित्तीय ट्रेल्स ने कई सवाल खड़े किए हैं।
जांच के दौरान ED ने पाया कि कई मदरसों और संस्थानों को बार-बार एक जैसी परियोजनाओं के नाम पर फंड दिए गए। कुछ एंट्रीज़ सिर्फ कागज़ों में मौजूद हो सकती हैं, और आशंका है कि धन का हिस्सा निजी खातों में साइफन हुआ हो।अस-सलाम यूनानी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज पर भी ED ने संदेह जताया है कि यह फर्जी मरीज डेटा दिखाकर सरकारी अनुदान हासिल करता था।
JIIU से जुड़े कुछ संस्थानों को सरकारी योजनाओं और विश्वविद्यालय आधारित ग्रांट्स मिले थे, KBCNMU की ओर से ₹60.10 लाख का अनुदान, STRIVE परियोजना के तहत प्रदर्शन आधारित राशि (World Bank समर्थित योजना) DST-FIST लेवल II प्रोग्राम के तहत शोध इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड लेकिन ED का कहना है कि इन पैसों का वास्तविक उपयोग अस्पष्ट है और कुछ दस्तावेज “शोध प्रोत्साहन” के नाम पर प्राप्त फंड्स के गलत इस्तेमाल की ओर इशारा करते हैं।
गृह मंत्रालय ने 15 जुलाई 2024 को JIIU का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था, क्योंकि ट्रस्ट ने गैर-FCRA पंजीकृत संस्थाओं को धन भेजने के नियम का उल्लंघन किया था। अब ED की हालिया जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि यह सिर्फ एक सीमित घोटाला नहीं बल्कि एक बहु-स्तरीय वित्तीय नेटवर्क था। ED की जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फंड्स सच में ज़मीनी स्तर तक पहुंचे या फिर यह पूरा ढांचा कागज़ों पर खड़ा किया गया ताकि फंड के परिवर्तन को छुपाया जा सके।
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