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कश्मीर में मिला विशाल बौद्ध परिसर: बरामूला की खोज ने खोला प्राचीन इतिहास का नया अध्याय

मोदी सरकार सांस्कृतिक धरोहर के पुनरुद्धार में कैसे जुटी है?

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जम्मू-कश्मीर के बारामूला ज़िले के ज़ेहानपोरा क्षेत्र में एक विशाल प्राचीन बौद्ध परिसर मिलने से भारतीय पुरातत्व जगत में हलचल मच गई है। कुशाण काल (1st–3rd शताब्दी ईस्वी) से जुड़े इस स्थल की खुदाई ने कश्मीर की सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक विरासत से जुड़े नए प्रमाण सामने रखे हैं।

परियोजना जम्मू-कश्मीर के डिपार्टमेंट ऑफ आर्काइव्स, आर्कियोलॉजी एंड म्यूज़ियम (DAAM), कश्मीर विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ सेंट्रल एशियन स्टडीज़ (CCAS) और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों का संयुक्त प्रयास है। खुदाई नवंबर में प्रारंभ हुई, लेकिन भारी बर्फबारी और ठंड के कारण इसे अस्थायी रूप से रोका गया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह परियोजना कई वर्षों तक चलेगी।

परियोजना निदेशक डॉ. मोहम्मद अजमल शाह के अनुसार, अब तक मिली सामग्री दर्शाती है कि यह स्थल एक सक्रिय बौद्ध मठ का नगर रहा होगा। खुदाई में मिले प्रमुख अवशेष, एक वृहद स्तूप के अवशेष, संरचनात्मक दीवारें, तांबे की वस्तुएँ, मिट्टी के बर्तन, पत्थरों के लेयर, पक्की नींव और आर्किटेक्चरल सजावटी टुकड़े, ड्रोन मैपिंग, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग राडार (GPR), डिजिटल आर्काइविंग और उच्च-रिज़ॉल्यूशन दस्तावेज़ीकरण से पता चलता है कि ये ढांचे प्राकृतिक टीले नहीं बल्कि योजनाबद्ध बौद्ध केंद्र के अवशेष हैं, जो संभवतः प्राचीन व्यापार मार्गों से जुड़े थे।

डॉ. शाह ने 2023 में फ्रांस के एक संग्रहालय के संग्रह में बारामूला के तीन स्तूपों की एक ऐतिहासिक तस्वीर खोजी। यह तस्वीर इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण बनी कि वर्तमान में मिले टीले उन्हीं प्राचीन स्तूपों के अवशेष हो सकते हैं। बाद के फील्ड सर्वेक्षण ने इस ऐतिहासिक संबंध की पुष्टि कर दी।

यह स्थल कनिष्कपुर और उश्कुर के निकट है। दोनों ही प्राचीन नगर कुशाण सम्राटों कनिष्क और हुष्क द्वारा स्थापित माने जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये तीनों स्थल कनिष्कपुर, उश्कुर और ज़ेहानपोरा, कुशाण काल में राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों की त्रयी थे। इस क्षेत्र की सामग्री संस्कृति में गांधार और मध्य एशिया के बौद्ध प्रभावों के संकेत भी मिले हैं।

केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में कश्मीर की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को पुनर्जीवित करने के कई प्रयास किए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने जनवरी 2025 में कहा था कि सरकार कश्मीर की खोई हुई धरोहर को “पुनः प्राप्त” करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जेहानपोरा की खुदाई कश्मीर के इतिहास के कई पहलुओं को नई रोशनी में ला सकती है, प्राचीन व्यापार मार्ग, बौद्ध धर्म का प्रभाव क्षेत्र, धार्मिक-सांस्कृतिक संबंध, कश्मीर की बहुस्तरीय सभ्यता, यह खोज उस बड़े बौद्ध नेटवर्क की उपस्थिति को भी दर्शाती है जो जम्मू-कश्मीर में अम्बरान (अखनूर) जैसे स्थलों से पहले भी सामने आ चुका है।

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