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Wednesday, March 11, 2026
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​सेकुलरिज्म का ठेका चलाने वालों के मुंह पर चिपक गया फेविकोल: सीएम योगी!

सीएम योगी ने कहा कि संत समाज को जोड़ने के लिए पूरी युक्ति करता है, जब संत समाज एक मंच पर जाकर उद्घोष करता है तो परिणाम भी आता है। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेले में आयोजित जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के 726वें प्राकट्य महोत्सव में शिरकत की और अपने विचार रखे। गोरक्षपीठाधीश्वर और सीएम योगी ने सेकुलरिज्म के नाम पर ठेका चलाने वालों पर प्रहार करते हुए बांटने वालों से बचने का भी आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि जाति और मत-संप्रदाय के आधार पर विभाजन हमारे लिए उसी प्रकार से सर्वनाश का कारण बन जाएगा, जैसे आज बांग्लादेश के अंदर देख रहे हैं। वहां की घटना पर कोई बोल नहीं रहा है।

सेकुलरिज्म के नाम पर ठेका लेकर चलने वालों की दुकानें हिंदू समाज और सनातन धर्म को तोड़ने की ताकत लगाती हैं, लेकिन बांग्लादेश की घटना पर उनके मुंह पर जैसे फेविकोल व टेप चिपक गया है। बांग्लादेश की घटना पर कोई कैंडल मार्च तक नहीं निकाला जा रहा। यह हमारे लिए चेतावनी भी है।

सीएम योगी ने चेताया कि जो लोग आज भी समाज को बांट रहे हैं, वे कभी हितैषी नहीं होंगे। सत्ता में रहने पर यह लोग परिवार के बाहर नहीं सोच पाते थे। यह फिर तमाम नारे देंगे, लेकिन इन्हें जब भी मौका मिलेगा तो वही करेंगे, जो पहले किया था।

पहचान का संकट, अराजकता, सनातन धर्म पर प्रहार और दंगों की आड़ में फिर हर व्यक्ति को झुलसाएंगे। हमें इसकी पुनरावृत्ति नहीं होने देनी चाहिए। डबल इंजन सरकार सनातन आस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए सदैव खड़ी है। बांटने, तोड़ने वाले और कमजोर करने वाले लोगों को कभी पनपने न दें।
हम सभी इस संकल्प के साथ बढ़ेंगे तो आने वाला समय सनातन धर्म का है। जिस तरह राम मंदिर पर ध्वज लहरा रहा है, उसी तरह दुनिया के अंदर सनातन का झंडा फहराता रहेगा और तब, बांग्लादेश में कमजोर व दलित हिंदू को काटने का कोई दुस्साहस नहीं कर पाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज की पावन धरा को कभी महर्षि भारद्वाज, महर्षि वाल्मीकि व अन्य पूज्य ऋषियों व महर्षियों ने अपने तप व साधना से सनातन धर्म के केंद्र के रूप में विकसित किया था।

त्रिवेणी की इस पावन धरा पर 726 वर्ष पूर्व भक्ति शिरोमणि भगवान रामानंदाचार्य प्रकट हुए थे। प्रयागराज की पावन धरा, भगवान वेणी माधव की अपार कृपा से, भगवान अक्षयवट के सानिध्य में, त्रिवेणी का वह रूप जिसे हम मां गंगा, मां यमुना व मां सरस्वती के रूप में स्मरण करते हैं, देश-दुनिया से श्रद्धालु यहां आकर संगम में डुबकी लगाते हैं। यहां धर्म, न्याय और ज्ञान भी है। तीनों को लेकर देश भर के अलग-अलग जिज्ञासु इस पावन धरा पर उपस्थित होते हैं।

सीएम योगी ने कहा कि सतुआ बाबा ने सबको जोड़ दिया। भगवान रामानंदाचार्य की पावन जयंती प्रयागराज में हो रही है। पौष पूर्णिमा इस वर्ष 3 जनवरी को पड़ गई, तो सभी इस आयोजन से जुड़ गए। सीएम ने सभी संतों का आह्वान किया कि आप बातचीत कीजिए।

दारागंज में जिस परिवार-स्थल पर रामानंदाचार्य जी प्रकट हुए थे, वहां उनका स्मारक व मंदिर बने, सरकार उसमें सहयोग करेगी। रामानंदाचार्य जी महाराज ने बंटे समाज को जोड़ने का कार्य किया था। उनकी प्रेरणा को जीवन का मंत्र बनाएं।

उन्होंने जगद्गुरु रामानंदाचार्य का जिक्र करते हुए कहा कि कोई अचानक महान नहीं बनता। महानता के लिए दिव्य गुणों को आत्मसात करने का सामर्थ्य, दृढ़ इच्छाशक्ति और दृष्टि भी होनी चाहिए।

सामान्य मनुष्य केवल अपने व परिवार के लिए सोचता है, उसकी दुनिया परिवार तक सीमित रहती है, लेकिन ईश्वरीय गुणों से भरपूर महामानव की दृष्टि दिव्य, कल्याण व धर्म के प्रति जागरूक करने की होती है। उनके भाव स्वयं और स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि परमार्थ के लिए होते हैं। इस धराधाम पर यही कार्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य भगवान ने किया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 726 वर्ष पूर्व कालखंड ऐसा था, जब आक्रमणकारी सनातन धर्म को रौंदना चाहते थे। विदेशी आक्रांताओं द्वारा समाज को तोड़ने, जाति के नाम पर बांटने, अनेक वादों के आधार पर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भन्न करने की साजिश हो रही थी। उस समय मत-संप्रदायों को एकजुट करने का आह्वान रामानंदाचार्य जी ने किया था।

उन्होंने कहा कि सभी जन ईश्वर के चरणों में शरणागत के सदैव अधिकारी हैं। मत-संप्रदाय के आधार पर मत बंटो। भगवान रामानंदाचार्य ने समाज को जोड़ने के लिए अलग अलग जातियों से द्वादश शिष्य (अनंताचार्य जी, कबीर दास जी, सद्गुरु रविदास जी, सदगुरु पीपा जी, सुरसुरानंद जी, सुखानंद जी, नरहर्यानंद जी, योगानंद जी, भावानंद जी, धन्ना जी, सैन जी व गैलवानंद जी महाराज) बनाए।
रामानंद परंपरा से निकलीं अलग-अलग धाराएं आज भी समाज को जोड़ती हैं। इस मंच पर अनेक परंपरा के संतों की उपस्थिति सनातन धर्म की एकता का उद्घोष कर रही है।

सीएम ने रविदासी संप्रदाय, कबीर दास समेत विभिन्न परंपराओं के संतों की उपासना भाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज ने उपासना विधि (सगुण व निर्गुण) के शिष्य दिए। उन्होंने बंटे समाज को जोड़ने का उद्घोष किया था।

सीएम योगी ने कहा कि संत समाज को जोड़ने के लिए पूरी युक्ति करता है, जब संत समाज एक मंच पर जाकर उद्घोष करता है तो परिणाम भी आता है।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूज्य संतों की साधना, एकता का परिणाम है, जिसे मूर्त रूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया। 1952 में पहला आम चुनाव हुआ, तबसे देश ने कई प्रधानमंत्री देखे। सभी ने देश के विकास में योगदान दिया, लेकिन अयोध्या की मूल आत्मा को सम्मान मिलना चाहिए और फिर से रामलला विराजमान होने चाहिए, इस भाव को मूर्त रूप देकर मोदी जी ने भारत की परंपरा को गौरवान्वित किया। मोदी जी पहले पीएम हैं, जिन्होंने राम मंदिर का दर्शन किया।
वे शिलान्यास, प्राण-प्रतिष्ठा व मंदिर निर्माण होने के उपरांत सनातन धर्म की ध्वजा पताका के आरोहण समारोह में भी पहुंचे। पीएम मोदी ने दुनिया को दिखा दिया कि कार्य करने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।

सीएम ने सुबह त्रिवेणी स्नान कर मां गंगा, यमुना व सरस्वती के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। उन्होंने कहा कि आज से 8-10 साल पहले यहां की स्थिति ऐसी नहीं थी, लेकिन जब राम और गंगा भक्त देश की सत्ता में रहे हैं तो ऐसा अवसर प्राप्त होता है।

मोदी जी ने नमामि गंगे के माध्यम से गंगा के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की, यह कार्य केवल भारत का सच्चा पुत्र ही कर सकता है। स्नान करने वाला उन्हें आशीर्वाद व आभार प्रकट कर रहा है। सीएम योगी ने कहा कि पौष पूर्णिमा पर 31 लाख श्रद्धालु आए। पिछले पांच-छह दिन में एक करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं।
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