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Monday, February 2, 2026
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साइड इनकम क्यों बन गई है ज़रूरत!

2026 में अतिरिक्त कमाई अब विकल्प नहीं

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आर्थिक अनिश्चितता और बदलते वर्क कल्चर के इस दौर में सिर्फ़ एक सैलरी पर निर्भर रहना अब पुराना विचार लगता है। भारत के बड़े शहरों से लेकर अमेरिका के उपनगरों तक, लाखों लोग आज साइड इनकम की ओर बढ़ रहे हैं,चाहे वह गिग वर्क हो, फ्रीलांसिंग हो या किसी शौक से जुड़ा काम। जो चीज़ कभी सीमित लोगों तक थी, वह अब एक आम रणनीति बन चुकी है। इसकी वजह है महंगाई का असर, नौकरी की अस्थिरता और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का तेज़ी से बढ़ना।

ताज़ा आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। अमेरिका में बैंकरेट के 2025 के सर्वे के मुताबिक, 27% वयस्क साइड हसल कर रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के 36% से कम ज़रूर है, लेकिन अब भी करोड़ों लोगों को दर्शाता है। साइड इनकम करने वाले लोग औसतन 885 डॉलर प्रति माह कमा रहे हैं, जिसका इस्तेमाल रोज़मर्रा के खर्चों से लेकर मनोरंजन तक के लिए किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें आई मामूली गिरावट की वजह अर्थव्यवस्था का कुछ हद तक स्थिर होना है, महंगाई में कमी और सैलरी में बढ़ोतरी के कारण कुछ लोग साइड हसल से पीछे हटे हैं, लेकिन आर्थिक दबाव अब भी बना हुआ है।

भारत की तस्वीर इससे अलग और कहीं ज़्यादा तेज़ी वाली है। यहां गिग इकॉनमी में जबरदस्त उछाल देखा गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स की संख्या 1.2 करोड़ तक पहुँच चुकी है, जो करीब 55% की बढ़ोतरी है। अनुमान है कि 2029-30 तक गिग जॉब्स कुल वर्कफोर्स का 6.7% हिस्सा बन सकती हैं। डिलीवरी, राइड-शेयरिंग और फ्रीलांसिंग जैसे सेक्टर सबसे आगे हैं, जो खासकर युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार, भारत के 43% Gen Z युवा स्थिरता और आज़ादी के लिए फुल-टाइम जॉब के साथ साइड इनकम को बेहतर विकल्प मानते हैं।

अभी साइड इनकम क्यों बढ़ रही है?

इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्थिक दबाव है। भले ही अब महंगाई की रफ्तार धीमी हो रही हो, लेकिन किराया, राशन और ज़रूरी सेवाओं की मांग बढ़ने लिए हैं। अमेरिका में पहले किए गए सर्वे बताते हैं कि लगभग आधे साइड हसल करने वाले लोग यह अतिरिक्त कमाई बुनियादी ज़रूरतों के लिए करते हैं। भारत में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां करीब 40% गिग वर्कर्स की मासिक आय 15,000 रुपये से कम है, जिससे साइड इनकम मुख्य आमदनी की कमी पूरी करने का जरिया बन जाती है।

नौकरी के बाजार की अनिश्चितता ने भी इस प्रवृत्ति को तेज़ किया है। टेक सेक्टर सहित कई क्षेत्रों में छंटनी, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है। युवा वर्ग, जो एजुकेशन लोन, बढ़ते खर्च और घर खरीदने जैसे लक्ष्यों से जूझ रहा है, एक से ज़्यादा कमाई के स्रोत बनाना सुरक्षित मान रहा है। एक अर्थशास्त्री के शब्दों में, “यह लचीलापन और सुरक्षा का सवाल है साइड इनकम मुश्किल समय में सहारा बनती है।”

डिजिटल क्रांति ने साइड इनकम को हर किसी के लिए संभव बना दिया है। Upwork, Swiggy, Uber, YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स ने स्मार्टफोन रखने वाले किसी भी व्यक्ति को कमाने का मौका दिया है। भारत के फ्रीलांसर अब ग्लोबल क्लाइंट्स के साथ काम कर रहे हैं, वहीं कंटेंट क्रिएटर्स अपने दर्शकों को कमाई में बदल रहे हैं। यह लचीलापन खासतौर पर Gen Z को पसंद आ रहा है, जो पारंपरिक 9-to-5 नौकरी से ज़्यादा संतुलन और स्वतंत्रता चाहता है।

हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। गिग वर्क में अक्सर सामाजिक सुरक्षा और स्थायी लाभों की कमी होती है। भारत में कम भुगतान एक बड़ी समस्या बना हुआ है, जबकि अमेरिका में कुछ लोग साइड हसल को सशक्तिकरण मानते हैं, तो कुछ इसे सैलरी के ठहराव का संकेत बताते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भी साइड इनकम की अहमियत बनी रहेगी। AI के कारण नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है और खर्च लगातार उतार-चढ़ाव में हैं। ऐसे में एक से ज़्यादा आय स्रोत मानसिक और आर्थिक सुरक्षा देते हैं। चाहे वह डिलीवरी ऐप के लिए काम करना हो, अपनी स्किल्स को फ्रीलांस करना हो या किसी शौक से कमाई करना साइड इनकम अब सिर्फ़ समझदारी नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुकी है। तेज़ी से बदलती अर्थव्यवस्था में साइड इनकम की  सोच अब आम होती जा रही है।

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