प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (7 फरवरी) को भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से मलेशिया की यात्रा पर रवाना हो चुके है। यह यात्रा 7 से 8 फरवरी 2026 तक होगी और मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो’ सेरी अनवर इब्राहिम के आमंत्रण पर की जा रही है। मलेशिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के साथ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और भारत सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरे में शामिल हैं। मलेशिया पहुंचने पर 8 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री मोदी को पुत्राजया स्थित पेरदाना पुत्रा कॉम्प्लेक्स में औपचारिक स्वागत दिया जाएगा।
द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग के क्षेत्र
औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री मोदी सेरी पेरदाना कॉम्प्लेक्स, पुत्राजया में मलेशियाई प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। मलेशिया के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता भारत-मलेशिया संबंधों की समग्र समीक्षा करेंगे और व्यापार व निवेश, रक्षा और सुरक्षा, श्रम, पर्यटन, कनेक्टिविटी, कृषि और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा करेंगे।
इसके अलावा, दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, “बैठक के बाद दोनों नेता भ्रष्टाचार से निपटने और उसकी रोकथाम, नाविकों के प्रशिक्षण, प्रमाणन और वॉचकीपिंग के मानकों, आपदा प्रबंधन, तथा ऑडियो-विजुअल प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों (MoU) के आदान-प्रदान के साक्षी बनेंगे।”
व्यापारिक रिश्तों की स्थिति:
भारत-मलेशिया के बीच व्यापारिक संबंधों में हाल के वर्षों में निरंतर वृद्धि देखी गई है। मलेशिया के विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार RM79.49 अरब (USD 18.59 अरब) तक पहुंच गया। इसमें भारत को मलेशिया का कुल निर्यात RM52.30 अरब (USD 12.24 अरब) रहा, जबकि भारत से आयात RM27.19 अरब (USD 6.35 अरब) दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा यात्रा में सेमीकंडक्टर (चिप) आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर विशेष जोर रहने की संभावना है, जो बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों के लिए अहम माने जा रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा न केवल मौजूदा सहयोग को नई गति देगी, बल्कि भविष्य में व्यापक आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करेगी।।
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