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डोकलाम-गलवान-बालाकोट से सुरक्षा प्रतिबद्धता दिखाई: सुजीत कुमार!

ओडिशा से भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि रक्षा बजट बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 16 प्रतिशत अधिक है।

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विकसित भारत के लिए सुरक्षित भारत अनिवार्य है। बजट पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में सत्ता पक्ष द्वारा यह कहा गया। इसके साथ ही सदन में कहा गया कि सरकार ने डोकलाम, गलवान, बालाकोट और अन्य अभियानों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

ओडिशा से भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि रक्षा बजट बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 16 प्रतिशत अधिक है। 2013-14 में रक्षा बजट लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपए था, जो अब तीन गुना से अधिक हो चुका है। सुजीत कुमार ने कहा कि बिना सुरक्षित भारत के विकसित भारत की कल्पना संभव नहीं है।

उन्होंने राज्यसभा में बजट पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत का रक्षा निर्यात 2013-14 में मात्र 686 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपए हो गया है। आने वाले दो-तीन वर्षों में इसे 50,000 करोड़ रुपए तक ले जाने का लक्ष्य है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्र अपनी सेना, नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल के साथ खड़ी है।

कुमार ने कहा कि 21वीं सदी के दूसरे चरण का यह पहला बजट केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों के लिए भारत की विकास यात्रा का विजन रोडमैप है। इसे उद्देश्यपूर्ण बजट, दर्शनयुक्त बजट और ‘कर्तव्य’ को समर्पित बजट बताया गया।

सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि यह बजट विकसित भारत की दिशा में बढ़ते राष्ट्र का मार्गदर्शक दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने सुशासन का एक नया सिद्धांत प्रस्तुत किया है, जिसे तीन कर्तव्यों में संक्षेपित किया गया है।

पहला कर्तव्य जनता की आकांक्षाओं को सशक्त करना। दूसरा, आर्थिक विकास को तीव्र गति देना और तीसरा कर्तव्य सबका साथ, सबका विकास’ सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यह कर्तव्य की राजनीति है, न कि कर्ज की या केवल कार्य की राजनीति। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार कर्तव्य आधारित राष्ट्र निर्माण पर बल दे रही है।

उन्होंने चाणक्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए कहा, “प्रजा सुखे सुखं राज्ञः, प्रजानां च हिते हितम्।” अर्थात शासक का सुख प्रजा के सुख में है और उसका हित प्रजा के हित में निहित है। इसी प्रकार राजधर्म को सर्वोच्च बताते हुए कहा गया कि राजधर्म अन्य सभी धर्मों की रक्षा करता है। यही प्राचीन भारतीय ज्ञान इस बजट में ‘कर्तव्य’ के रूप में परिलक्षित होता है।

उन्होंने दूसरा स्तंभ शिक्षा को बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षित भारत विकास का इंजन है। बजट में शिक्षा के लिए करीब 1,40,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 8 प्रतिशत अधिक है। समग्र शिक्षा के लिए 22,000 करोड़ रुपए, पीएम-श्री योजना के लिए 7,500 करोड़ रुपए तथा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के लिए 7,150 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

पांच नए यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित किए जाएंगे, जिससे उद्योग और अकादमिक जगत के बीच समन्वय बढ़ेगा। स्कूलों में 15,000 कंटेंट लैब स्थापित करने का प्रस्ताव है, ताकि भारत डिजिटल और ऑडियंस अर्थव्यवस्था में अग्रणी बने।

तीसरा स्तंभ महिला सशक्तिकरण है। सुजीत कुमार ने कहा कि जब आप एक महिला को सशक्त बनाते हैं तो आप एक सभ्यता को सशक्त बनाते हैं। बजट में महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं और उद्यमिता प्रोत्साहन पर बल दिया गया है। खेल और युवा शक्ति को भी महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष खेलों के लिए बड़ी धनराशि का प्रावधान किया गया है, जो 2013-14 की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। ‘खेलो इंडिया’ मिशन के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए प्रयासरत है और 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी कर रहा है। इन निवेशों का उद्देश्य भारत को 2036 तक शीर्ष 10 खेल राष्ट्रों में शामिल करना है।
 
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