साल 2023 में अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान एक बेहद संवेदनशील कूटनीतिक पृष्ठभूमि मौजूद थी, जिसका दावा अब अमेरिकी अभियोजकों द्वारा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नु की हत्या की कथित साजिश उसी समय रची जा रही थी, जब पीएम मोदी व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के निमंत्रण पर राजकीय दौरे पर थे। हालांकि, अमेरिका और भारत—दोनों ने स्पष्ट किया है कि इस कथित साजिश की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी को नहीं थी और भारत ने इसमें किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
यह मामला चर्चा में आने की वजह भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने हाल ही में अमेरिकी अदालत में अपने बयान को बदलते हुए अपराध स्वीकार कर लिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि जून 2023 में कथित साजिश पीएम मोदी व्हाइट हाउस में स्टेट विज़िट पर होने के समय जारी थी।

22 जून 2023 को राष्ट्रपति जो बाइडन और फर्स्ट लेडी जिल बाइडन ने पीएम मोदी के सम्मान में राजकीय रात्रिभोज (स्टेट डिनर) आयोजित किया था। यह कार्यक्रम अपने भव्य आयोजन और कूटनीतिक संदेशों के कारण काफी चर्चा में रहा। उस समय इसे बाइडन प्रशासन की उस रणनीति के रूप में देखा गया था, जिसके तहत भारत को चीन और रूस से रणनीतिक रूप से और करीब लाने की कोशिश की जा रही थी। खासतौर पर यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव ने इस यात्रा को और अधिक अहम बना दिया था।
अमेरिकी अभियोजकों का दावा है कि जब बाइडन और मोदी उस डिनर में शामिल थे, तब अमेरिकी राष्ट्रपति को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि न्यूयॉर्क में पन्नु की हत्या की कथित साजिश को किसी भारतीय अधिकारी ने मंजूरी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बाइडन को इस कथित साजिश की जानकारी बाद में मिली। निखिल गुप्ता को स्टेट डिनर के कुछ ही दिनों बाद चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था और 2024 में उसे अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने भी यह कहा है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि पीएम मोदी को इस कथित साजिश की जानकारी थी। राष्ट्रपति बाइडन ने सार्वजनिक रूप से इस मामले का उल्लेख करने से परहेज़ किया। 2024 में सत्ता संभालने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस प्रकरण पर न तो सार्वजनिक बयान दिया और न ही भारत पर कोई आरोप लगाया।
ताज़ा घटनाक्रम में निखिल गुप्ता ने तीन आरोप मर्डर-फॉर-हायर, मर्डर-फॉर-हायर की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश को स्वीकार कर लिया है। दोष स्वीकार करने के साथ गुप्ता एक हाई-प्रोफाइल ट्रायल से बच गए हैं, जिसमें उन्हें अधिकतम 40 साल की सजा हो सकती थी। अमेरिकी सरकार ने 21 से 24 साल की जेल की सजा की मांग की है। उनकी सजा पर फैसला 29 मई को सुनाया जाना तय है।
अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, ‘निक’ के नाम से परिचित निखिल गुप्ता एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स और हथियार तस्कर थे और एक पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी विकास यादव के सहयोगी थे। यादव पर भी अमेरिका में आरोप तय किए गए हैं, लेकिन उनकी गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है। अमेरिका का दावा है कि कथित साजिश के समय विकास यादव कैबिनेट सचिवालय में कार्यरत थे, जहां रिसर्च एंड एनालिसिस विंग स्थित है।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि यादव ने गुप्ता को अमेरिका में पन्नु की हत्या की साजिश रचने के लिए भर्ती किया। पन्नु को भारत में UAPA के तहत आतंकी घोषित किया गया है और उस पर खालिस्तान के निर्माण के लिए हिंसा भड़काने के आरोप हैं। गुप्ता ने कथित तौर पर एक व्यक्ति से संपर्क किया, जिसे वह अपना “मित्र” समझता था, और हत्या के लिए 1 लाख डॉलर की डील तय की गई थी।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, गुप्ता के टेक्स्ट मैसेज से पता चलता है कि उसने पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के साथ हत्या न टकराए, इसके लिए वारदात को टालने को कहा था। लेकिन वह व्यक्ति दरअसल ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन का अंडरकवर अधिकारी निकला।
भारत ने आधिकारिक तौर पर पन्नु के खिलाफ किसी भी साजिश से खुद को अलग बताया है और यह भी कहा है कि विकास यादव अब सरकार के कर्मचारी नहीं हैं।
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