पृथ्वी का चंद्रमा सदियों से मानव कल्पना को आकर्षित करता रहा है। नंगी आंखों से उसके कलाओं का अवलोकन, शुरुआती दूरबीनों से दिखे उसके मैदान, पहाड़ और क्रेटर—इन सबने इंसान को हमेशा यह सोचने पर मजबूर किया कि वहां जाना कैसा होगा। अब एक बार फिर मानवता चंद्रमा की ओर लौटने की दहलीज पर खड़ी है, और इसका अगला बड़ा कदम है अमेरिकी अंतरिक्ष खोजी विभाग NASA का Artemis II मिशन। हाल ही में आई खबरों के अनुसार NASA इस मिशन की जांच में तकनीकी खामी के बाद मार्च 2026 से अप्रैल तक मिशन टलने की बात की गई है।
1957 में स्पेस एज की शुरुआत के बाद चंद्रमा जल्द ही मानव अन्वेषण का प्रमुख लक्ष्य बन गया। मर्करी और जेमिनी कार्यक्रमों के जरिए अंतरिक्ष में रहने और यान संचालित करने का अनुभव हासिल करने के बाद NASA ने अपोलो कार्यक्रम के तहत ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। 1969 में Apollo 11 की सफल लैंडिंग से लेकर 1972 तक अपोलो 11, 12, 14, 15, 16 और 17 मिशन्स में कुल 12 अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरे। आज तक अमेरिका ही एकमात्र देश है जिसने इंसानों को चंद्रमा पर उतारने में सफलता पाई है।
चंद्रमा पर इंसानों को भेजना केवल प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं थी। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह बेहद अहम था। चंद्रमा की सतह पर लगाए गए उपकरणों और वहां से लाए गए सैकड़ों किलोग्राम पत्थरों के अध्ययन से वैज्ञानिकों को चंद्रमा की आयु और उसकी उत्पत्ति से जुड़े सिद्धांतों को समझने में मदद मिली।
14 दिसंबर 1972 को Apollo 17 के अंतरिक्ष यात्रियों के लौटने के बाद इंसान चंद्रमा पर वापस नहीं गया। इसके बाद दशकों तक नासा का लक्ष्य स्पेस शटल कार्यक्रम, International Space Station के निर्माण और सैकड़ों उपग्रहों व टेलीस्कोप पर रहा। हालांकि इस दौरान अमेरिका, रूस, चीन, जापान, यूरोप, भारत और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने बिना चालक वाले यानों से चंद्रमा का अध्ययन जारी रखा।
हालांकि 2017 में NASA ने Artemis program की औपचारिक शुरुआत की। इसका लक्ष्य न केवल इंसानों को दोबारा चंद्रमा की सतह पर ले जाना है, बल्कि वहां दीर्घकालिक मानव उपस्थिति की नींव रखना भी है। कार्यक्रम के तहत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने और चंद्रमा की कक्षा में Gateway नामक नए स्टेशन की स्थापना की योजना है। पहला मिशन Artemis I 2022 में सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
आर्टेमिस-II: अगला मानवयुक्त मिशन
आर्टेमिस-II इस श्रृंखला का पहला मिशन होगा जिसमें इंसान सवार होंगे। चार अंतरिक्ष यात्री Orion यान (जिसका नाम Integrity है) से चंद्रमा की ओर रवाना होंगे। यह मिशन चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश या लैंड नहीं करेगा, बल्कि चंद्रमा के सुदूर हिस्से के चारों ओर घूमकर लौटेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 2.3 लाख मील दूर होंगे, अब तक इंसानों द्वारा तय की गई यह सबसे दूर की यात्रा होगी।

आर्टेमिस-II के चार सदस्य अमेरिका और कनाडा का प्रतिनिधित्व करेंगे:
- रीड वाइसमैन (कमांडर)
- विक्टर ग्लोवर (पायलट)
- क्रिस्टीना हैमॉक कोच (मिशन स्पेशलिस्ट)
- जेरेमी हैनसन (मिशन स्पेशलिस्ट, कनाडा)
यह मिशन पहली महिला, पहले अश्वेत और पहले कनाडाई अंतरिक्ष यात्री को लो अर्थ ऑर्बिट से आगे ले जाएगा।
दरम्यान फरवरी 2026 की शुरुआत में NASA ने Space Launch System रॉकेट का “वेट ड्रेस रिहर्सल” किया, जिसमें कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आईं। इन्हें ठीक करने के बाद दूसरा रिहर्सल होगा। फिलहाल आर्टेमिस-II का लॉन्च मार्च 2026 से पहले तय नहीं हो सकता है। 6 से 10 मार्च और फिर अप्रैल के कुछ दिनों में संभावित लॉन्च विंडो उपलब्ध हैं। हालांकि अंतिम तारीख तकनीकी समीक्षा और परीक्षणों के बाद ही घोषित होगी।
चार साल बाद इंसान को चंद्रमा की ओर ले जाने वाला यह मिशन न केवल अंतरिक्ष विज्ञान, बल्कि भविष्य में मंगल जैसी दूरस्थ यात्राओं की दिशा में भी एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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