यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के बीच अमेरिका ने रूस की मंशा पर खुला संदेह जताया है। म्यूनिक सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन को अब भी स्पष्ट नहीं है कि रूस वास्तव में यूक्रेन के साथ शांति समझौते के लिए गंभीर है या नहीं। उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि रूसी युद्ध समाप्त करने को लेकर गंभीर हैं या नहीं।”
ज्ञात हो की अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में रूस और यूक्रेन के बीच दो दौर की बातचीत को सुविधाजनक बनाने में भूमिका निभाई थी। हालांकि, इन त्रिपक्षीय बैठकों से किसी बड़े राजनयिक बदलाव की बजाय केवल कैदियों की अदला-बदली ही संभव हो सकी, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग रिहा किए गए।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते की दिशा में तेज़ी दिखाने का आग्रह किया। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “ज़ेलेंस्की को आगे बढ़ना होगा। रूस समझौता करना चाहता है और ज़ेलेंस्की को आगे बढ़ना पड़ेगा; नहीं तो वह एक बड़ा मौका चूक जाएंगे। उन्हें कदम उठाना होगा।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के भीतर और सहयोगी देशों में यह बहस जारी है कि क्या मॉस्को वास्तव में किसी स्थायी समाधान के लिए तैयार है या केवल समय काटने की रणनीति अपना रहा है।
कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए रूस और यूक्रेन अगले सप्ताह जिनेवा में एक और दौर की बातचीत करने वाले हैं। यह बैठक दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय रियायतों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर साझा आधार तलाशने की कोशिश के तहत होगी। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूस की सरकारी समाचार एजेंसी को बताया कि 17–18 फरवरी को त्रिपक्षीय वार्ता का नया दौर आयोजित किया जाएगा। इससे पहले दो सत्र अबू धाबी में हो चुके हैं।
मॉस्को की मांग है कि यूक्रेनी बल पूर्वी डोनबास क्षेत्र के डोनेत्स्क के उस हिस्से से हट जाएं, जो अब भी कीव के नियंत्रण में है। हालांकि, यूक्रेनी अधिकारियों ने बिना किसी पारस्परिक कदम के पीछे हटने के विचार को खारिज कर दिया है। कीव का कहना है कि किसी भी संभावित संघर्षविराम से पहले पश्चिमी देशों की ओर से ठोस सुरक्षा गारंटी आवश्यक है, ताकि रूस भविष्य में दोबारा सैन्य हमला न कर सके।
चार साल से जारी इस युद्ध को लेकर म्युनिक सम्मेलन में आई प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद दोनों पक्षों के रुख में गहरी खाई बनी हुई है। जहां अमेरिका और उसके सहयोगी समाधान की संभावना तलाश रहे हैं, वहीं रूस की वास्तविक मंशा को लेकर संदेह अब भी केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है।
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