समाचार एजेंसी के अनुसार, बोरा ने अपने पत्र में लिखा है कि उन्हें पार्टी नेतृत्व द्वारा दुर्लक्षित किया जा रहा था और राज्य इकाई में उन्हें उनका उचित स्थान नहीं दिया गया। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि उनका इस्तीफा किसी एक व्यक्ति या निजी कारणसे प्रेरित नहीं है। बोरा ने कहा,“मैंने 32 वर्षों तक कांग्रेस की सेवा की है और मुझे पार्टी के भविष्य की चिंता है। मैंने अपने इस्तीफे के पत्र में सभी कारणों का विस्तार से उल्लेख किया है। मैं कुछ भी छिपाता नहीं हूं और न ही कोई कदम गुप्त रूप से उठाऊंगा।”
इस्तीफे की खबर फैलते ही आसाम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बोरा को असम कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता बताते हुए कहा कि वह मंगलवार (17 फरवरी)शाम उनके घर जाएंगे। सरमा ने कहा, “तीन साल पहले हम भूपेन बोरा का स्वागत करने और उन्हें एक सुरक्षित सीट देने के लिए तैयार थे।” उन्होंने कहा, “आसाम में कांग्रेस की स्थिति बेहद खराब है। उम्मीदवारों के चयन के लिए तीन पर्यवेक्षक यहां आए हैं। उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय से एक विधायक सौंपा गया है। स्थिति वाकई गंभीर है। असम में कांग्रेस के कई जिला कार्यालयों में बैठकें एक विशेष समुदाय की धार्मिक प्रार्थना से शुरू होती हैं। असम में कांग्रेस तेजी से बदल रही है। लोग इसे महसूस कर रहे हैं। भूपेन बोराह का इस्तीफा एक प्रतीकात्मक संदेश देता है कि कांग्रेस ने अपना आखिरी हिंदू नेता खो दिया है,”
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि जब से उन्होंने वर्तमान आसाम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई पर पाकिस्तान से संबंधों का आरोप लगाया है, तब से जमीनी स्तर पर कई हिंदू कांग्रेस नेता उनके पक्ष में आ रहे हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले पंद्रह दिनों में लगभग पांच और विधायक पाला बदल सकते हैं।
सरमा ने कांग्रेस की स्थिति को भयावह बताते हुए आरोप लगाया कि राज्य में पार्टी तेजी से बदल रही है और जिला कार्यालयों में एक विशेष समुदाय की धार्मिक प्रार्थना से बैठकें शुरू होती हैं। उनके अनुसार,“भूपेन बोरा का इस्तीफा एक सांकेतिक संदेश है कि कांग्रेस ने अपना आखिरी हिंदू नेता खो दिया है।”
बोरा 2021 से 2025 तक आसाम कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और पिछले वर्ष उनकी जगह गौरव गोगोई को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पार्टी नेतृत्व का मानना था कि बोरा अपने कार्यकाल में एक स्तर तक पहुंच चुके थे और भाजपा के खिलाफ मुख्यमंत्री सरमा का मुकाबला करने के लिए बड़े कद के नेता की जरूरत है।
हालांकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा से लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद जमीनी स्तर पर संगठन को पुनर्जीवित करने का श्रेय बोरा को ही जाता है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उनका इस्तीफा पार्टी के भीतर असंतोष और अनिश्चितता का संकेत माना जा रहा है।
इधर, गुवाहाटी स्थित बोरा के आवास पर कई विपक्षी नेता पहुंचे हैं। अखिल गोगोई सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने उनसे मुलाकात की है। वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, भंवर जितेंद्र सिंह और प्रद्युत बोर्डोलोई भी उनसे बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं।
असम की सियासत में इस घटनाक्रम ने नई हलचल पैदा कर दी है और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए यह स्थिति जटिल और चुनौतीपूर्ण बन चुकी है।
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