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Saturday, March 14, 2026
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सोनम वांगचुक को हिरासत से छोड़ने का फैसला

गृह मंत्रालय ने जारी किए आदेश

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सितंबर 2025 में लेह में हुई हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए सोनम वांगचुक की रिहाई के आदेश केंद्र सरकार ने जारी कर दिए हैं। गृह मंत्रालय (भारत) ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए यह निर्णय लिया है। केंद्र ने NSA के तहत वांगचुक की नजरबंदी वापस लेने का फैसला किया है।

गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लेह के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धाराओं के तहत सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। 24 सितंबर को लेह में बिगड़ी कानून-व्यवस्था की स्थिति के बाद यह कार्रवाई की गई थी। मंत्रालय ने बताया कि वांगचुक पहले ही हिरासत की अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर चुके हैं।

केंद्र सरकार ने इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय में इस गिरफ्तारी का बचाव किया था। सरकार का कहना था कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के पीछे वांगचुक मुख्य भड़काने वालों की भूमिका में थे, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। सरकार ने यह भी तर्क दिया था कि एनएसए के तहत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और उनकी हिरासत के बाद स्थिति शांत हो गई थी। साथ ही सरकार ने कहा कि वह लद्दाख के विभिन्न समुदायों और हितधारकों से लगातार संवाद कर रही है, ताकि क्षेत्र के लोगों की चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान किया जा सके।

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सरकार ने यह भी कहा था कि बंद और विरोध प्रदर्शनों का मौजूदा माहौल समाज की शांतिपूर्ण प्रकृति के लिए नुकसानदेह है। इसका असर छात्रों, नौकरी तलाशने वालों, व्यापारियों, टूर ऑपरेटरों और पर्यटकों सहित समाज के कई वर्गों पर पड़ा है और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सभी पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद के लिए सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने कहा, “इसी उद्देश्य की पूर्ति और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है।”

सरकार ने लद्दाख की सुरक्षा और विकास के लिए आवश्यक सभी उपाय उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही उम्मीद जताई है कि इस क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान रचनात्मक संवाद और सहभागिता के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें उच्चाधिकार प्राप्त समिति की व्यवस्था और अन्य उपयुक्त मंच भी शामिल होंगे।

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