कश्मीरी अलगाववादी नेता और दुख्तरान-ए-मिल्लत (डीईएम) की प्रमुख आसिया अंद्राबी को दिल्ली की एनआईए विशेष अदालत ने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है।
एनआईए अदालत ने आसिया अंद्राबी के दो अन्य सहयोगियों सोफी फहमिदा और नाहिदा नसरीन को भी 30-30 साल की सजा दी है। यह फैसला उन आरोपों पर आधारित है, जिनमें कश्मीर घाटी में महिलाओं और युवाओं को अलगाववाद की ओर भड़काने, आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारत सरकार के खिलाफ साजिश रचने का मामला शामिल था।
पिछले जनवरी 2026 में एनआईए अदालत ने आसिया अंद्राबी समेत तीनों महिलाओं को यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के विभिन्न प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया था।
अदालत ने उनके भाषणों, साक्षात्कारों, सोशल मीडिया पोस्ट्स और संगठनात्मक गतिविधियों को साक्ष्य मानते हुए सजा सुनाई। हालांकि अदालत ने उन्हें सीधे युद्ध छेड़ने और आतंकवाद के लिए फंड जुटाने जैसे कुछ आरोपों से बरी कर दिया था। लेकिन, साजिश रचने और आतंकवादी संगठन को समर्थन देने के आरोप सिद्ध हुए।
आसिया अंद्राबी दुख्तरान-ए-मिल्लत नामक महिला संगठन की चेयरपर्सन हैं। एनआईए का आरोप था कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने कश्मीर में अलगाववादी विचार फैलाए, युवाओं को हिंसक रास्ते पर ले जाने की कोशिश की और भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
सजा सुनाए जाने के दौरान एनआईए ने कोर्ट से कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में सख्त सजा जरूरी है, ताकि देश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था मजबूत रहे। वहीं बचाव पक्ष ने स्वास्थ्य कारणों और पहले से जेल में बिताए समय का हवाला देते हुए नरमी की मांग की थी।
यह मामला 2018 में दर्ज किया गया था। एनआईए ने आरोप लगाया था कि आसिया अंद्राबी और उनके साथी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के संपर्क में थे और कश्मीर को भारत से अलग करने की कोशिश कर रहे थे। अदालत ने करीब आठ साल की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया।
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