गौबा ने भारत में खानपान की आदतों में तेजी से हो रहे बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शहरीकरण, बदलती जीवनशैली और सोशल मीडिया तथा त्वरित वाणिज्य प्लेटफार्मों द्वारा प्रेरित अति-प्रसंस्कृत और परिष्कृत खाद्य पदार्थों की बढ़ती खपत लोगों को पारंपरिक, पोषक तत्वों से भरपूर आहार से दूर कर रही है।
आंत के स्वास्थ्य को व्यापक विकास संदर्भ में रखते हुए, गौबा ने स्वास्थ्य सेवा को व्यक्तिगत कल्याण और आर्थिक विकास दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश तभी साकार हो सकता है जब कार्यबल स्वस्थ हो और बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए सक्रिय और स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए समय पर तैयारी की जाए।
साथ ही, राजीव गौबा ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, समानता, वहनीयता, गुणवत्ता, रोगी सुरक्षा और कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी से संबंधित लगातार चुनौतियों को स्वीकार किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सामाजिक-आर्थिक कारकों से प्रभावित होती रहती है।
प्रोबायोटिक्स के विकसित होते क्षेत्र पर चर्चा करते हुए, गौबा ने कहा कि माइक्रोबायोम विज्ञान वर्णनात्मक अध्ययनों से आगे बढ़कर क्रियाविधि और व्यावहारिक अनुसंधान की ओर अग्रसर हो चुका है। उन्होंने अगली पीढ़ी के माइक्रोबायोम-आधारित उपचार, सिंथेटिक बायोलॉजी और सीआरआईएसपीआर-सक्षम प्रोबायोटिक उपभेदों के निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जिनमें लक्षित सूजनरोधी और चयापचय संबंधी कार्य होते हैं, ताकि सटीक चिकित्सा प्रदान की जा सके।
हालांकि, उन्होंने प्रोबायोटिक्स और सप्लीमेंट्स के बाजार में गलत सूचनाओं और भ्रामक विज्ञापनों के बढ़ते प्रसार के प्रति आगाह किया और चिकित्सकों और शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपनी विश्वसनीयता और मीडिया पहुंच का उपयोग सटीक जानकारी प्रसारित करने, स्वस्थ आहार संबंधी आदतों को बढ़ावा देने और निवारक जीवनशैली का समर्थन करने के लिए करें, जिससे महंगे निदान और प्रक्रियाओं की आवश्यकता कम हो जाती है।
गौबा ने कहा कि देश क्लीनिकल रूप से प्रमाणित प्रोबायोटिक्स विकसित करने के लिए पारंपरिक ज्ञान को जीनोमिक और माइक्रोबायोम अनुसंधान के साथ जोड़कर वैश्विक प्रोबायोटिक आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है।
युवा शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों की भागीदारी की सराहना करते हुए, गौबा ने उन्हें जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-विषयक और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संगोष्ठी नए सहयोगों को बढ़ावा देगी और माइक्रोबायोम और प्रोबायोटिक विज्ञान के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करेगी।
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