देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इन नेताओं ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष नीतिन नबीन से मुलाकात की।
पार्टी छोड़ने वालों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल के अलावा स्वाति मालीवाल, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, उद्योगपति राजिंदर गुप्ता और उद्यमी विक्रम सहनी शामिल हैं। इन नेताओं ने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सदस्य उनके साथ हैं और उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के तहत BJP में विलय का फैसला किया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा, हमने तय किया है कि हम, राज्यसभा में AAP के 2/3 सदस्य, भारत के संविधान के नियमों का पालन करते हुए BJP में शामिल हो जाएंगे।
उन्होंने AAP पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा,“जिस AAP को मैंने 15 साल तक अपने खून से सींचा, वो अपने रास्ते से भटक गई है। अब वो देश की भलाई के लिए नहीं, बल्कि अपने फायदे के लिए काम कर रही है… मैं AAP से दूर जा रहा हूं और लोगों के पास आ रहा हूं…”
Delhi: Rajya Sabha MPs Raghav Chadha, Sandeep Pathak and Ashok Mittal meet BJP National President Nitin Nabin at the party headquarters
2/3rd MPs of AAP in the Rajya Sabha announced merging with the BJP. pic.twitter.com/cRLnmOQRFZ
— ANI (@ANI) April 24, 2026
चड्ढा ने आगे कहा, “मैं इस पार्टी का फाउंडिंग मेंबर था… लेकिन आज, बहुत दुख, दर्द और शर्म के साथ, मैं कहता हूं कि यह पार्टी, जो करप्शन खत्म करने के वादे के साथ बनी थी, अब करप्ट और कॉम्प्रोमाइज़्ड लोगों के हाथों में बुरी तरह फंस गई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में शामिल कई लोग अलग-अलग क्षेत्रों से आए थे, जिनमें वैज्ञानिक, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे, और सभी ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के उद्देश्य से काम किया था।
इस घटनाक्रम को AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब पार्टी ने दिल्ली और पंजाब में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई थी। वहीं, BJP के लिए यह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का सामूहिक इस्तीफा और विलय आने वाले समय में संसद और राज्यों की राजनीति पर प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, AAP की ओर से इस पर अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है, जहां एक ओर दल-बदल और विचारधारा पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
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