हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने विक्रम-1 रॉकेट के प्री-लॉन्च परीक्षणों में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने ‘इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिकल टेस्ट कैंपेन’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो परीक्षण प्रक्रिया का तीसरा चरण (फेज-3) माना जाता है और रॉकेट की पहली उड़ान से पहले एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
यह परीक्षण रॉकेट की सभी इलेक्ट्रिकल प्रणालिया, जैसे एवियोनिक्स, वायरिंग और विभिन्न सबसिस्टम्स के समन्वित संचालन की जांच के लिए किया गया। इस दौरान लॉन्च जैसी परिस्थितियों का सिमुलेशन कर यह सुनिश्चित किया गया कि सभी सिस्टम वास्तविक मिशन के दौरान बिना किसी रुकावट के काम करें।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह चरण रॉकेट की विश्वसनीयता और मजबूती को परखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे पहले कंपनी मैकेनिकल और अन्य सबसिस्टम्स से जुड़े परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है, जिससे विक्रम-1 की समग्र तैयारी को लेकर भरोसा बढ़ा है।
विक्रम-1 रॉकेट को छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए विकसित किया गया है। इसकी खासियत इसकी मॉड्यूलर डिजाइन और कम लागत में लॉन्च की क्षमता है, जो वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती छोटे सैटेलाइट लॉन्च की मांग को पूरा करने में सहायक हो सकती है।
स्काईरूट एयरोस्पेस का यह प्रयास भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को भी दर्शाता है, जो अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर देश की अंतरिक्ष गतिविधियों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में योगदान दे रहा है।
कंपनी अब अंतिम एकीकरण (फाइनल इंटीग्रेशन) और लॉन्च की तैयारियों की ओर बढ़ रही है। इस उपलब्धि को भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में निजी क्षेत्र की भूमिका को और मजबूत कर सकता है।
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