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Wednesday, October 21, 2026
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रिजिजू ने एनडीए में आए सात सांसदों का किया स्वागत! 

यह घटना तब हुई, जब राज्यसभा ने सोमवार को पार्टी पदों की एक नई सूची जारी की, क्योंकि आम आदमी पार्टी के सात सदस्यों ने पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल की घोषणा की थी।

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) से भाजपा में शामिल हुए 7 राज्यसभा सदस्यों का स्वागत किया। रिजिजू ने कहा कि उन सांसदों ने सदन ने न कभी अपशब्दों का प्रयोग किया न अनुशासनहीनता की।

यह घटना तब हुई, जब राज्यसभा ने सोमवार को पार्टी पदों की एक नई सूची जारी की, क्योंकि आम आदमी पार्टी के सात सदस्यों ने पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल की घोषणा की थी। इस बदलाव से सदन में भाजपा का प्रतिनिधित्व 107 से बढ़कर 113 हो गया, जबकि आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व घटकर तीन रह गया।

दलबदल करने वाले नेताओं- राघव चड्डा, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी ने पिछले सप्ताह आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले का खुलासा किया।

रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 7 आप सांसदों के भाजपा में आना स्वीकार कर लिया है। अब, राघव चड्डा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी भाजपा संसदीय दल के सदस्य हैं।”

संसद में उनके आचरण की प्रशंसा करते हुए मंत्री ने कहा, “मैंने लंबे समय से देखा है कि इन 7 सांसदों ने कभी अपशब्दों का प्रयोग नहीं किया है और न ही कभी किसी प्रकार की अनुशासनहीनता या असंसदीय आचरण का प्रदर्शन किया है।”

भाजपा में उनका स्वागत करते हुए उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण करने वाले एनडीए में आपका स्वागत है और टुकड़े-टुकड़े इंडिया ब्लॉक को अलविदा।”

इस कदम से संसद के ऊपरी सदन में भाजपा की उपस्थिति और मजबूत हुई। अब राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधित्व केवल तीन सदस्य- संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह ही कर रहे हैं।

दलबदल करने वाले समूह में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत शामिल था। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, जिसे 1985 में 52वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था, सदस्य दल-बदल नहीं कर सकते, हालांकि, “विलय” के लिए एक अपवाद है।

यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई निर्वाचित सदस्य किसी अन्य पार्टी में विलय करने के लिए सहमत होते हैं, तो वे अयोग्य नहीं ठहराए जाते, न ही वे सदस्य अयोग्य ठहराए जाते हैं जो मूल पार्टी में बने रहने का विकल्प चुनते हैं। चड्ढा और अन्य छह लोगों ने भाजपा में शामिल होने के पीछे इसी नियम का हवाला दिया।

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