शनिवार (2 मई) को देशभर में एंड्रॉइड और iOS स्मार्टफोनों पर अचानक एक साथ अलर्ट आया और लोगों के फोन अलार्म की तरह बजने लगे। इससे शुरुआत में कई लोग घबरा गए और यह क्या हो रहा है, इसे लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि, कुछ ही देर में स्पष्ट हो गया कि यह एक आपातकालीन संदेश था। भारत ने अपने नागरिकों के लिए तत्काल आपदा सूचना सेवा के तहत स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा शुरू की है।
भारत ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शनिवार को देशव्यापी मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली की शुरुआत की गई। इस दौरान नागरिकों के मोबाइल पर ‘अत्यंत गंभीर चेतावनी’ का संदेश प्राप्त हुआ। दरअसल, इस स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली का पूरे देश में परीक्षण चल रहा है, ताकि आपदा से जुड़ी चेतावनियां तेजी से लोगों तक पहुंचाई जा सकें। इसी के तहत सरकार ने शनिवार (2 मई) को यह टेस्ट मैसेज भेजा।
नागरिकों को यह अलर्ट हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में भेजा गया था। इसमें लिखा था, “भारत ने स्वदेशी तकनीक के जरिए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा शुरू की है, जिससे नागरिकों को आपदा की तुरंत जानकारी मिल सके। सजग नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र। इस संदेश को प्राप्त करने के बाद किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। यह एक परीक्षण संदेश है।” यह मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से विकसित की है, ताकि महत्वपूर्ण जानकारी समय पर लोगों तक पहुंच सके।
संचार मंत्रालय के अनुसार, यह प्रणाली अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ द्वारा सुझाए गए कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है। फिलहाल यह देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय है और भौगोलिक रूप से चयनित क्षेत्रों के मोबाइल उपयोगकर्ताओं को एसएमएस के जरिए आपदा और आपातकालीन सूचनाएं भेजती है। इस प्रणाली का उपयोग आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। प्राकृतिक आपदाओं, मौसम चेतावनियों और चक्रवातों के दौरान अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से ज्यादा एसएमएस अलर्ट भेजे जा चुके हैं।
त्सुनामी, भूकंप, बिजली गिरना, गैस रिसाव या रासायनिक खतरे जैसी मानव-निर्मित आपात स्थितियों में समय पर चेतावनी देने के लिए एसएमएस के साथ सेल ब्रॉडकास्ट (CB) तकनीक को भी जोड़ा गया है।
सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली के जरिए किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र के सभी मोबाइल उपकरणों पर एक साथ अलर्ट भेजा जाता है, जिससे सूचना लगभग तुरंत पहुंच जाती है। दूरसंचार विभाग के प्रमुख अनुसंधान एवं विकास केंद्र ‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स’ (सी-डॉट) को इस स्वदेशी सेल ब्रॉडकास्ट आधारित सार्वजनिक आपातकालीन अलर्ट प्रणाली के विकास और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है।
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