पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तहत तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के लंबे समय तक सदस्य रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और संसद सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। एक दशक से अधिक समय तक राज्यसभा में टीएमसी का प्रतिनिधित्व करने वाले रॉय का यह फैसला ऐसे समय आया है जब पार्टी विधानसभा चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद आंतरिक चुनौतियों और राजनीतिक दबावों का सामना कर रही है।
सुखेंदु शेखर रॉय ने अपना इस्तीफा टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को भेजा। अपने पत्र में उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति और पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि राज्य की जनता ने “पार्टी के व्यापक भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्यधिक अत्याचार, तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में उसकी पूर्ण विफलता और फैली अराजकता को खारिज कर दिया है।”
अपने इस्तीफे में रॉय ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सफलता का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा, “मतदाताओं ने बंगाल के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को सीटों के लिहाज से भारी जीत दिलाई है। नव-निर्वाचित सरकार ने अपने चुनावी वादों के अनुरूप बंगाल के समग्र विकास और पुनर्निर्माण के लिए कई कार्यक्रमों पर काम शुरू भी कर दिया है।”
रॉय का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब ममता बनर्जी दिल्ली में विभिन्न विपक्षी दलों के साथ संपर्क साधने और इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की कोशिशों में जुटी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का लगातार असंतोष टीएमसी के लिए नई चुनौती बन सकता है।
सुखेंदु शेखर रॉय उन नेताओं में गिने जाते रहे हैं जिन्होंने 2011 में टीएमसी के सत्ता में आने के बाद से ममता बनर्जी का लगातार साथ दिया। पार्टी के भीतर उन्हें नेतृत्व के भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों में माना जाता था। ऐसे में उनका इस्तीफा सिर्फ एक संसदीय पद छोड़ने का मामला नहीं, बल्कि टीएमसी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, रॉय सोमवार सुबह संसद पहुंचे और राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होंगे या नहीं।
विधानसभा चुनावों में हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में पार्टी के सबसे वरिष्ठ संसदीय नेताओं में से एक का इस्तीफा राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रॉय के इस कदम का टीएमसी की संगठनात्मक स्थिति और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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