अभ्यास के दौरान आग लगने की काल्पनिक स्थिति तैयार कर विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया गया। ड्रिल के तहत यात्रियों की सुरक्षित निकासी (इवैक्यूएशन), रेस्क्यू ऑपरेशन तथा घायलों के प्रबंधन (कैजुअल्टी मैनेजमेंट) की प्रक्रियाओं को निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के अनुरूप अंजाम दिया गया। इस दौरान विभिन्न टीमों की प्रतिक्रिया क्षमता और आपसी तालमेल का भी परीक्षण किया गया।
सीआईएसएफ के अनुसार, इस प्रकार की फायर सेफ्टी मॉक एक्सरसाइज आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता को परखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
एपीएस-सीआईएसएफ ने एक्स पोस्ट में लिखा, “दिल्ली एयरपोर्ट पर आग लगने की घटना से निपटने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। दिल्ली एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ के कमांडेंट/एडमिनिस्ट्रेटर रवीश कुमार सिंह की देखरेख में आग लगने की घटना से निपटने के लिए एक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस ड्रिल में सीआईएसएफ कर्मियों के साथ-साथ एयरपोर्ट की मेडिकल टीम और एआरएफएफ ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।”
पोस्ट में आगे लिखा गया, “ड्रिल के दौरान, तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुसार लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने (इवैक्यूएशन), बचाव कार्यों और घायलों के प्रबंधन की प्रक्रियाएं पूरी की गईं।
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