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Friday, July 17, 2026
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हाइड्रोजन ट्रेन युग की शुरुआत, PM मोदी ने किया शुभारंभ

जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ी पहली हाइड्रोजन ट्रेन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच चली। इसके साथ ही भारत हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेन शुरू करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया है। इससे पहले हाइड्रोजन ट्रेन सिर्फ जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में ही चल रही हैं। 10 कोच वाली यह ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर 14 स्टेशनों के बीच 75 km प्रति घंटे की मैक्सिमम स्पीड से चलेगी। इसका किराया 5 से 25 रुपये के बीच रखा गया है। ट्रेन 89 km का सफर करीब 2 घंटे में पूरा करेगी।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा, “हरियाणा के लिए ऐतिहासिक दिन”

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हरियाणा के करीब 2.75 करोड़ लोगों की तरफ से मैं आपका तहे दिल से स्वागत करता हूं। आज का मौका सिर्फ एक इवेंट नहीं है, बल्कि एक विकसित भारत के अमर संकल्प और राष्ट्र निर्माण की सामूहिक चेतना का प्रतीक है। आज सिर्फ प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन और शिलान्यास का दिन नहीं है, बल्कि यह दिन पूरे हरियाणा के लिए ऐतिहासिक बन गया है। ग्रीन एनर्जी के प्रति कमिटमेंट की वजह से ही हरियाणा और हमारे जीवन को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का मालिक बनने का सम्मान मिला है।” आप 1.4 अरब भारतीयों के संकल्प के सारथी हैं। आपने सिर्फ प्लान ही नहीं बनाए, बल्कि देश की दशा और दिशा दोनों बदल दी हैं। आज भारत संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ रहा है। पहले भारत दुनिया से टेक्नोलॉजी लेने की कोशिश करता था, लेकिन अब दुनिया भारत की टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को देख रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स भारत में मौके ढूंढ रहे हैं। आज पूरी दुनिया कह रही है कि यही नया भारत है, यही वो भारत है जिसका मोदी ने वादा किया था।

रेल मंत्री ने कहा, “भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला पांचवा देश बना”

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “आज एक ऐतिहासिक दिन है। भारत ने हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी के लिए बहुत कमिटमेंट दिखाया है और इस दिशा में अहम कदम उठाए हैं। भारत अब हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों वाले पांच देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है।”

जींद में लगा हाइड्रोजन प्रोजेक्ट हाइड्रोजन से बिजली बनाता है, जिससे यह ट्रेन चलती है। इस टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे कोई धुआं या प्रदूषण नहीं होता। यह सिर्फ पानी की बूंदें और पानी की भाप छोड़ती है, जिससे यह पूरी तरह से इको-फ्रेंडली टेक्नोलॉजी बन जाती है।

हाइड्रोजन ट्रेन के लिए जींद-सोनीपत रूट क्यों चुना गया?

इसके पीछे दो कारण हैं। पहला, इस रूट पर ट्रैफिक कम है, यहां से रोज़ाना आठ ट्रेनें चलती हैं। दूसरा, यह रूट दिल्ली के पास है (जींद 145 km दूर है)। इससे रेलवे अधिकारियों को टेक्निकल मदद देना और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट करना आसान हो गया। यह एक नॉन-इलेक्ट्रिफाइड ब्रॉड गेज रूट है।

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