उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा खरीदे गए धान की हेराफेरी के लगभग 500 करोड़ रुपए के लेन-देन और लगभग 90,000 टन धान की हेराफेरी ने पूरे तेलंगाना में व्यापक चिंता पैदा कर दी है।
रामचंदर राव ने पत्र में लिखा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि कस्टम पिसाई के लिए मिलों को सौंपा गया हजारों टन धान न तो स्टॉक में मिला और न ही चावल के रूप में सरकार को लौटाया गया, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।
धान खरीद प्रणाली को किसानों की आजीविका की एक महत्वपूर्ण सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण ढांचे का एक अनिवार्य घटक बताते हुए भाजपा नेता ने कहा कि सरकारी स्टॉक का कोई भी गबन या दुरुपयोग न केवल सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उन किसानों का विश्वास भी तोड़ता है जो एक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह खरीद तंत्र पर निर्भर हैं।
उन्होंने पत्र में लिखा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मैं मांग करता हूं कि चल रही जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित तरीके से की जाए, और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के साथ, चाहे उनका पद या प्रभाव कुछ भी हो, कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने आगे कहा कि खरीद, परिवहन, भंडारण और कस्टम मिलिंग प्रक्रियाओं में निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए उचित प्रणालीगत सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाने चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके और प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।



