महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड ने ठाणे जिले में एक बड़े ऑपरेशन में इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े भगोड़े आतंकी तारिक खान की 21 साल की बेटी नमीरा तारिक खान को मुंब्रा से अरेस्ट किया है। इस ऑपरेशन से जांच एजेंसियों की एक्टिविटी तेज हो गई हैं, और नमीरा के विदेश ट्रैवल और नकली पासपोर्ट केस की जांच चल रही है।
जांच एजेंसियों की जानकारी के मुताबिक, नमीरा पर गलत जानकारी देकर पासपोर्ट बनवाने का शक है। पता चला है कि उसने कुर्ला और लखनऊ के पतों का इस्तेमाल करके मिले पासपोर्ट के आधार पर दो बार सऊदी अरब ट्रैवल किया। जांच एजेंसियों को शक है कि इन ट्रिप के दौरान वह अपने फरार पिता से मिली थी। यह भी जांच की जा रही है कि क्या नमीरा सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान भी गई थी। उसके ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स, पासपोर्ट और दूसरी संबंधित जानकारी चेक की जा रही है।
कुछ दिनों से मुंब्रा में रह रहा था
जांच एजेंसियां तारिक खान की पत्नी शबनम उर्फ फिरदौस तारिक खान की भी तलाश कर रही हैं। पता चला है कि शबनम फरार है। इस दौरान जांच में पता चला कि नमीरा और उसकी मां कुछ दिनों से मुंब्रा इलाके में रह रही थीं। उसके बाद ATS ने नमीरा के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया। बताया गया है कि तारिक खान के खिलाफ प्रतिबंधित संगठन SIMI, इंडियन मुजाहिदीन, नकली करेंसी, आतंकवादी गतिविधियां और देश विरोधी गतिविधियों समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह पिछले कई सालों से फरार है।
कौन है तारिक खान?
तारिक खान का पूरा नाम मोहम्मद तारिक अंजुमन हसन है और वह बिहार का रहने वाला बताया जाता है। पता चला है कि वह पेशे से सिविल इंजीनियर है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह 1998 से बैन संगठन ‘SIMI’ में एक्टिव है। कहा जाता है कि वह 2003 में रियाज़ भटकल और इकबाल भटकल के साथ इंडियन मुजाहिदीन की स्थापना में शामिल था। जांच में उसका नाम इस संगठन के फाउंडिंग मेंबर और आइडियोलॉजिकल गाइड के तौर पर भी सामने आया। 2007 के आसपास, तारिक खान का नाम पुणे के कोंढवा इलाके में इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कुछ युवाओं को पनाह देने और मदद करने के मामले में भी सामने आया था। इस बीच, नमीरा की गिरफ्तारी के बाद ATS उसके विदेश दौरे के सही मकसद, नकली पासपोर्ट के इस्तेमाल और उसके फरार पिता के साथ उसके रिश्तों की जांच कर रही है। उसकी मां की भी तलाश की जा रही है।
SIMI क्या है?
स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया की स्थापना 1977 में अलीगढ़ में हुई थी। शुरुआत में, संगठन ने मुस्लिम युवाओं में धार्मिक और सामाजिक जागरूकता पैदा करने पर ध्यान दिया। हालांकि, आगे चलकर संगठन पर गंभीर आरोप लगे कि इसके कट्टरपंथी विचारधारा और आतंकवादी गतिविधियों से संबंध हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने 2001 में SIMI पर बैन लगा दिया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, SIMI से जुड़े कुछ पुराने सदस्य बाद में इंडियन मुजाहिदीन में शामिल हो गए। हालांकि, SIMI और इंडियन मुजाहिदीन अलग-अलग संगठन हैं।
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