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Sunday, November 1, 2026
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रूस से तेल खरीदने पर भारत को 100 परसेंट ‘टैरिफ’ का सामना करना पड़ेगा

US में बैन बिल के लिए वोटिंग

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US हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक ज़रूरी बिल को आगे बढ़ाने के लिए हुए वोट से भारत की मुश्किलें बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। US ने रूस से कच्चा तेल और नैचुरल गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक बैन लगाने की दिशा में एक और कदम उठाया है। US हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान पर बैन से जुड़ा एक बिल आगे बढ़ाया है, जिससे प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को भारत समेत रूस से एनर्जी खरीदने वाले देशों पर 100 परसेंट तक इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का अधिकार मिल सकता है।

यह बिल ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रशिया एंड ईरान सैंक्शन्स एक्ट ऑफ़ 2026’ नाम से पेश किया गया है। मंगलवार को हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स में हुए एक प्रोसिजरल वोट में यह बिल 214 वोटों के मुकाबले 211 से पास हो गया। अब इस बिल पर आखिरी वोटिंग होगी। इस बिल पर चर्चा के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी के MP स्टेनी होयर ने जो अमेंडमेंट पेश किया है, उसमें भारत समेत 10 देशों का ज़िक्र रूस के तेल व्यापार में बड़े पार्टनर के तौर पर किया गया है। इस लिस्ट में भारत, चीन, तुर्की, अज़रबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूनाइटेड अरब अमीरात, सिंगापुर, कज़ाकिस्तान और किर्गिज़ रिपब्लिक शामिल हैं। इन देशों पर 100 परसेंट तक इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का प्रोविज़न प्रपोज़ किया गया है।

हालांकि, जब से यह बिल हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में आगे बढ़ा है, तब से भारत पर तुरंत 100 परसेंट इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगाई गई है। इस बिल को पहले हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स से पास होना होगा और फिर प्रेसिडेंट के साइन होने होंगे। उसके बाद ही इस पावर का इस्तेमाल करने का सवाल उठेगा। इस बिल को अगस्त में US सीनेट में भारी बहुमत से मंज़ूरी मिली थी। सीनेट में हुई वोटिंग में बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि इसके खिलाफ 11 वोट पड़े।

इस बिल का मकसद सिर्फ़ रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव डालना नहीं है। रूस के एनर्जी सेक्टर पर बैन बढ़ाने के अलावा, इस बिल में ‘सीक्रेट फ्लीट’ के उन जहाजों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिनके बारे में US का कहना है कि उनका इस्तेमाल बैन से बचने के लिए किया जा रहा है। US के मुताबिक, रूस के कच्चे तेल के व्यापार से होने वाली कमाई यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए फाइनेंशियल रिसोर्स देती है। इसलिए, कहा जा रहा है कि इस बिल का मुख्य मकसद रूस के एनर्जी व्यापार पर दबाव बढ़ाना है।

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