‘भ्रामरी’ का अर्थ है ‘भौंरा’, और इस प्राणायाम को करते समय निकलने वाली ध्वनि ठीक-भौंरे की गुंजन जैसी होती है, इसलिए इसे यह नाम दिया गया है। अगर किसी भी व्यक्ति को नींद की कमी, मन शांत या छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है, उनके लिए भ्रामरी प्राणायम किसी भी रामबाण से कम नहीं है। सिर्फ 2 मिनट का यह अभ्यास आपके दिमाग को कैसे शांत करने में मदद करता है।
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, भ्रामरी प्राणायाम दिमाग शांत करने में मदद करता है। तनाव कम होता है, गुस्सा कंट्रोल में रहता है, और मन की बेचैनी भी धीरे-धीरे दूर होने लगती है। इसके नियमित अभ्यास से दिमाग और नसों को आराम मिलता है, जिससे सोचने-समझने की ताकत भी बढ़ती है।
प्राणायाम योग शास्त्र में श्वास-प्रश्वास (भ्रामरी) को नियंत्रित और विस्तारित करने की एक प्राचीन प्रक्रिया बताया गया है। यह शब्द दो हिस्सों से मिलकर बना है, ‘प्राण’ (जीवन शक्ति या ऊर्जा) और ‘आयाम’ (विस्तार या नियंत्रण)।
भ्रामरी प्राणायाम एक सरल और प्रभावी तकनीक है, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मन को शांति और शरीर को राहत देती है। हालांकि, एक्सपर्ट भ्रामरी प्राणायाम करते समय कुछ सावधानियां बरतने की भी सलाह देते हैं। इसे खाली पेट या भोजन के कुछ घंटों बाद करें। कान या साइनस के गंभीर रोगों से पीड़ित लोग इसे न करें।



