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Thursday, August 13, 2026
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इंडोनेशिया के पादरी रॉबर्ट बन गए संघ के प्रचारक,जानें

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रांची। पादरी राबर्ट सॉलोमन आरएसएस की विचारधारा और संघ के अधिकारियों से मिले तो उनके प्रेम से इतने प्रभावित हुए कि स्वयं मतांतरित होकर डा. सुमन कुमार संघ के प्रचारक बन गए। RSS के विचारों को समझने के लिए इंडोनेशिया के जकार्ता से भेजे गए पादरी को अपनाने का निर्णय लिया और उस समय के प्रचारकों ने इन्हें इतना प्रेम दिया कि वे फिर भारत के ही होकर रह गए। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में आर्गेनिक रसायन में रिसर्च करने के दौरान ही वे पादरी बन चुके थे और मतांतरण के काम से इनका चेन्‍नई में आना-जाना 1982 से शुरू था। संघ की गतिविधियों को नजदीक से समझने के लिए ईसाई मिशनरियों ने 25 वर्ष की उम्र में 1984 में इन्हें भारत भेजा और 2 वर्षों में संघ के कामों को नजदीक से देखने और हिंदू चिंतन व दर्शन से इतने प्रभावित हुए की स्वयं को हिंदू बनना स्वीकार किया।

1986 में मतांतरित होकर आर्य समाज पद्धति से हिंदू सनातन धर्म स्वीकार कर लिया। उसी वर्ष संघ के प्रचारक बन गए और हिंदू जागरण मंच के काम में लगाए गए। संघ के वरिष्ठ प्रचारक और आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डा. अशोक वार्ष्‍णेय कहते हैं कि सुमन कुमार को उस समय के संघ के प्रचारकों ने पुत्र की तरह पाला। ठाकुर राम गोविंद सिंह तो उनको पुत्र और वे उन्हें पिता मानने लगे थे, जो उत्तर प्रदेश के हिंदू जागरण मंच के संगठन मंत्री थे। ईसाई होने के कारण संघ ने नया प्रयोग करते हुए इन पर विश्‍वास किया और वे भी संघ की विचारधारा में पूरी तरह रंग गए। सुमन कुमार ने भाषा की समस्या को दूर करने के लिए वर्तमान अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन से काफी सहयोग लिया। आज हिंदू जागरण मंच के उत्तर पूर्व क्षेत्र झारखंड-बिहार के संगठन मंत्री का दायित्व निभा रहे हैं l

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