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साल 2022 के विवादित मुद्दे!

साल 2022 के विवादित मुद्दे जो सुर्खियों में बनी रही।

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साल 2022 को समाप्त होने में अब महज कुछ ही दिन बचे हैं। हम बहुत सारी यादों के साथ साल 2022 को अलविदा कहने जा रहे हैं। हालांकि इस साल कई यादगार घटनाएं घटी, जिन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी। साल 2022 के पन्नों को पलट कर देखें तो कई ऐसे मुद्दे रहे, जिन पर जमकर विवाद भी हुआ। इन मुद्दों पर सड़क से लेकर संसद तक बवाल मचा। आइए जानते हैं आखिर देश में 2022 में वो कौन कौन से मुद्दे थे, जो विवादों में घिरे रहे।

भारत में इस साल लाउडस्पीकर की चर्चा चारों तरफ रही। देशभर में लाउडस्पीकर को लेकर सियासत गर्म रही। मस्जिदों के ऊपर लगे लाउडस्पीकर के विरोध में आवाज उठी। मई 2022 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने राज्य में जमकर विरोध किया था। लाउडस्पीकर पर अजान की खिलाफत करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ होने लगा था। लाउडस्पीकर पर महाराष्ट्र से उठी चिंगारी धीरे-धीरे बाकी राज्यों तक पहुंच गई थी। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, बिहार समेत कई राज्यों में लाउडस्पीकर पर खूब हंगामा मचने लगा था। बाद में इसको लेकर सरकार ने कदम उठाए और इस विवाद को खत्म करने की कोशिश की।

नूपुर शर्मा विवाद, बीजेपी की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा इस साल काफी सुर्खियों में रहीं। दरअसल, 27 मई 2022 को उन्होंने एक टीवी डिबेट के दौरान पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी की थी। इसके बाद देश भर में नूपुर शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन हुए। देश के कई हिस्सों में हिंसा हुई और नूपुर मुस्लिम संगठनों और कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गईं। बाद में इस विवादित बयान के चलते नूपुर को इस्तीफा देना पड़ा और बीजेपी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से सस्पेंड कर दिया। उनके साथ-साथ पार्टी के दिल्ली मीडिया यूनिट के प्रभारी नवीन कुमार जिंदल को नूपुर शर्मा के बयान वाले पोस्ट को ट्वीट करने के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। वहीं नुपुर की कथित विवादित टिप्पणी को लेकर दुनिया के कई मुस्लिम देशों ने अपना विरोध जताया था। इस लिस्ट में करीब 15 देश शामिल रहे।

हिजाब का विवाद इस साल सबसे ज्यादा सुर्खियों में बना रहा। इस विवाद की शुरुआत पिछले साल 31 दिसंबर को हुई थी जब उडुपी के सरकारी पीयू कॉलेज में हिजाब पहन कर आई छह छात्राओं को क्लास में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। हालांकि विवाद इस साल के जनवरी में गती पकड़ी जब उडुपी के विधायक रघुपति भट ने कहा कि जो छात्राएं बिना हिजाब के स्कूल नहीं आ सकती हैं वो ऑनलाइन पढ़ाई करें। लेकिन अगले दिन छात्राओं ने ऑनलाइन के माध्यम से क्लास में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद फरवरी माह में उडुपी के कुंडापुर में सरकारी कॉलेज में भी हिजाब पर विवाद शुरू हो गया। वहीं मुस्लिम छात्राओं द्वारा हिजाब पहनने के विरोध में हिंदू छात्र-छात्राएं भगवा शॉल और स्कार्फ पहन कर कॉलेज में पहुंचने लगे। इस विवाद के चलते राज्य सरकार ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम 1983 की धारा 133(2) लागू कर दी। इसके अनुसार सभी छात्र-छात्राओं के लिए कॉलेज में तय यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य कर दिया गया। इस वजह से हिजाब विवाद ने हिंसक रूप से लिया। कर्नाटक में कई जगहों पर झड़पें हुईं। कई जगहों पर पथराव भी हुए।

‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ यानी पीएफआई पर सरकार ने सितंबर महीने में प्रतिबंध लगा दिया और इसके बाद 100 से ज्यादा एक्टिव मेंबर्स को गिरफ्तार कर लिया गया था। कथित रूप से आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना था कि पीएफआई और उसके सहयोगी ऐसे विनाशकारी कृत्यों में शामिल रहे, जिससे जन व्यवस्था प्रभावित हुई, देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर किया गया साथ ही आतंक-आधारित शासन को प्रोत्साहित किया गया। बता दें कि पीएफआई का गठन 22 नवंबर, 2006 को केरल के कोझीकोड में हुआ था। पीएफआई के अलावा सरकार ने रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, रिहैब फांउडेशन केरल नेशनल विमेंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन पर भी प्रतिबंध लगाया।

वहीं लव जिहाद का मुद्दा साल 2022 में विवाद का विषय बना रहा है। इस साल लव जिहाद की गूंज चुनावों में भी खूब सुनने को मिली है। 2022 में उत्तर प्रदेश और गुजरात समेत कई राज्यों में चुनाव हुए, जिसमें लव जिहाद के मुद्दे ने खूब सुर्खियां बटोरी। यूपी में मौजूद कानून में शादी के बाद जबरन धर्म परिवर्तन, किसी से भी झूठा विवाह करवाना, ऐसी शादी को बढ़ावा देना, कानून के तहत अपराध है। खासकर भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को अपने मुख्य एजेंडे में शामिल किया था। इतना ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर लव जिहाद के खिलाफ कानून की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। वहीं लव जिहाद को लेकर महाराष्ट्र की एकनाथ शींदे सरकार जल्द राज्य में अधिनियम पेश कर सकती है।

जिसमें ताजा मामले कुछ इस प्रकार से है दरअसल 8 मई 2022 को आफताब ने श्रद्धा की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसके शव के 35 टुकड़े करके दिल्ली के जंगलों में फेंक दिए। 19 मई से लेकर 5 जून यानि 18 दिनों तक आफताब श्रद्धा के शव के 35 टुकड़ों को ठिकाने लगाता रहा और किसी को कोई खबर नहीं हुई। उसके बाद झारखंड के साहिबगंज में दिलदार अंसारी ने रबिता पहाड़िन नामक युवती को मोहब्बत का वास्ता देकर शादी रचाई थी, उसके बाद रबिता के शरीर के 50 टुकड़े कर के कुत्तों के बीच फेंक दिया था। आरोपीें ने कटर मशीन से रबिता के शव के बोटी-बोटी करने के बाद उसे ठिकाने लगाया था। ऐसे ही नवी मुंबई में लव जिहाद का एक और मामला सामने आया था। जहां जिम ट्रेनर रियाज खान ने प्रेम जाल में फंसाकर राजस्थान की उर्वी वैष्णव की हत्या कर दी। दोनों करीब 7 माह से लिव-इन में रह रहे थे। इस तरह से लव जिहाद कई अन्य मामले देखे गए। जिसके बाद लव जिहाद को लेकर सम्पूर्ण देश मे कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया गया।

समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी भी एक ऐसा मुद्दा रहा है, जो 2022 में विवाद की एक वजह रहा है। इस साल की राजनीति लव जिहाद के साथ साथ यूसीसी मुद्दे के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आई। विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठाते हुए सरकार को निशाने पर लेता रहा है। जबकि भारतीय जनता पार्टी इसे देशहित में बताते हुए लागू करने की कोशिश कर रही है। कई राज्यों में इसकी कवायद शुरू भी हो चुकी है। इतना ही नहीं, इसी शीतकालीन सत्र के दौरान बीजेपी के सांसद किरोडी लाल मीणा ने संसद में यूसीसी को लेकर एक निजी विधेयक का भी प्रस्ताव रखा। समान नागरिक संहिता पूरे देश के लिए एक कानून सुनिश्चित करेगी, जो सभी धार्मिक और आदिवासी समुदायों पर उनके व्यक्तिगत मामलों जैसे संपत्ति, विवाह, विरासत और गोद लेने आदि में लागू होगा। इसका मतलब यह है कि हिंदू विवाह अधिनियम (1955), हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (1956) और मुस्लिम व्यक्तिगत कानून आवेदन अधिनियम (1937) जैसे धर्म पर आधारित मौजूदा व्यक्तिगत कानून तकनीकी रूप से भंग हो जाएंगे। भारत के इन विवादों की बात करें तो लाजमी है कि इसका प्रभाव 2023 में भी नजर आएगा।

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