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यूनिफ़ार्म सिविल कोड तुष्टीकरण नहीं संतुष्टिकरण

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अमेरीका से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल भोपाल में अपना पहला भाषण दिया। और ये भाषण बहुत ही आक्रामक और दमदार था। भोपाल में बीजेपी की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम जिसका नाम था मेरा बूथ सबसे मजबूत। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के सवालों के जवाब दिए। और ये कार्यक्रम जो है असल में चुनावों की तैयारियों को ध्यान में रख कर किया गया था। जिसमें बीजेपी के कार्यकर्ता थे। और ये कार्यक्रम लगभग ढाई घंटे तक चला। जिसमें पीएम मोदी ने 3 महत्वपूर्ण बातों पर अपना पक्ष रखा। इसमें जिसकी सबसे पहली चर्चा हो रही है वो है यूसीसी यानी यूनिफ़ार्म सिविल कोड दूसरी चर्चा है गारंटी और तीसरी चर्चा है- परिवारवाद।

सबसे बड़ी बात यह है कि वर्ष 2014 में जब से नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने। तब से उन्होंने सीधे तौर पर कभी यूनिफ़ार्म सिविल कोड के बारे में ऐसा कभी कुछ नहीं बोला जैसे कि इस भाषण के दौरान उन्होंने कहा। इसलिए शायद आज पहली बार उन्होंने एक देश एक कानून के मुददें पर खुलकर बात की है। और कहा है कि देश के मुसलमानों को यूनिफ़ार्म सिविल कोड के खिलाफ गुमराह करने की कोशिश हो रही है। जबकि यूनिफार्म सिविल कोड एक तरह से भेदभाव को मिटाने के लिए है और उन्होंने ये भी कहा कि जब पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बाहुल्य देशों में तीन तलाक समाप्त हो सकता है। तो हमारे देश में समाप्त क्यों नहीं हो सकता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यूनिफ़ार्म सिविल कोड पर बोलना मुसलमानों के बारे में बोलना इसकी सहायता से पीएम मोदी मुस्लिमों को आगाह करना चाहते है कि उन्हें अलग-अलग मुद्दों पर भड़काने की कोशिश की जा रही है। अभी हाल ही में जब पीएम मोदी अमेरिका से लौट कर आयें है तब अमेरिका में भी उन्होंने ये देख लिया की पूरी दुनिया में एक ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है। जैसे की पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी है और अब वो मुस्लमनाओं के हितों की बात नहीं करते। लेकिन आज अपने पहले ही भाषण में उन्होंने सबसे पहले उसी मुददें पर देश के मुसलमानों को संपर्क करने कोशिश की है।

यूनिफ़ार्म सिविल कोड को हिन्दी में सामान नागरिक संहिता या सामान नागरिक कानून भी कहते है। इसका मतलब होता है सभी धर्म, सभी पंथ,और सभी जाती लोगों के लिए एक समान कानून। भारत में अभी क्रिमिनल लॉ तो सभी धर्मों के लिए समान है। लेकिन सिविल लॉ के मामले में स्थिति आज भी काफी अलग है। जैसे आज शादी, तलाक, संपत्ति, बच्चों को गोद लेने के मामले सिविल लॉ के दायरे में आते है। अगर भारत में इस तरह के सिविल मामलों के निपटारे के लिए कोई एक कानून होता तो शायद इस पर कोई विवाद होता ही नहीं लेकिन भारत में अभी स्थिति बहुत अलग है।

भारत में शादी, तलाक और संपत्ति जैसे मामलों एक लिए हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग तो एक समान कानों के दायरे में आते है। इन सभी के लिए एक कानून है। लेकिन इन्हीं मामलों के निपटारे के लिए भारत में मुस्लिम, ईसाई, पारसी और यहूदी धर्म के लोगों के पास अपने अपने पर्सनल लॉव्झ है। यानी उनपर अलग कानून लागू होते है। जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉव्झ के हिसाब से कोई भी मुसलमान पुरुष बिना तलाक लिए चार शादियाँ कर सकता है। लेकिन हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग तलाक लिए बिना दूसरी शादी अगर करते है तो ये कानूनन अपराध माने जाते है। और 10 साल की सजा इसमें हो सकती है। इसी तरह मुस्लिम पर्सनल लॉव्झ में लड़कियों की शादी की उम्र 15 साल है और कॉमन लॉव्झ में हिन्दू सिख, जैन और बौद्ध धर्म में लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल है।

सोचनेवाली बात यह है कि भारत का संविधान वैसे तो धर्मनिरपेक्ष है लेकिन भारत के कानून सभी धर्मों के लिए एक जैसे नहीं है। लेकिन इसके बावजूद भारत में जब भी इस बात पर बात होती है। तो इसका विरोध होता है। और अब जब पीएम मोदी ने ये भाषण दिया तभी AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर एक नई बहस छेड दी। ओवैसी ने आज प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि क्या सरकार इनकम टैक्स में हिन्दू अविभाजित परिवार के प्रवधान को भी खत्म करेगी जिसकी वजह से देश को हर साल 3 हजार करोड़ का नुकसान होता है।

हिन्दू अविभाजित परिवार यानि जो संयुक्त परिवार होता है। ये प्रावधान उनके लिए होता है। इसके तहत जो लोग अभी परिवारों में इंडिविजुएल टैक्स भरते है। यानी अपने इनकम पर सरकार के हिसाब से उसे टैक्स चुकाते है। वो अपने संयुक्त परिवार का एक अकाउंट बनाकर सरकार से इनकम टैक्स पर छूट ले सकते है। इनकम टैक्स से जुड़े इस कानून को नागरिकों के सिविल अधिकारों में तो गिना जाएगा, लेकिन वैसे ये आर्थिक मामलों से जुड़ा प्रावधान है। इसे आप ऐसे समझ सकते है कि भारत में किसान इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आते है। जबकि बाकी वर्ग के लोग इनकम टैक्स के दायरे में आते है। समानता यहाँ भी नहीं है लेकिन इसे यूनिफ़ार्म सिविल कोड के साथ नहीं गिना जा सकता है। इसलिए ऐसा लगता है कि असदुद्दीन ओवैसी ने यूनिफ़ार्म सिविल कोड के विरोध में ये गलत मुद्दा उठाया है।

हालांकि आज जब भारत में यूनिफ़ार्म सिविल कोड लाने की कोशिश हो रही है तो इसे भी एक तरह का सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है। जबकि ये कदम भारत को एक स्वस्थ लोकतंत्र बनाने की और कदम है। जिसमें हिंदुओं को भी बराबर अधिकार होंगे और मुसलमानों को भी बराबर के अधिकार मिलेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में एक नई तरह की  दी। गारंटी और ये गारंटी फ्री बिजली, फ्री पानी, बेरोजगारी भत्ता या लोन माफी की गारंटी नहीं थी। पीएम मोदी की ये गारंटी है घोटाले बाज नेताओं पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की।

ऐसा लगता है जब पीएम मोदी अपने अमेरिकी दौरे से भारत आएं होंगे। तो आते ही उन्होंने सबसे पहले पूछा कि यहाँ क्या चल रहा है? और उन्होंने एक बात जो अमेरिका से खुद लाया होगा। उन्होंने देखा होगा अमेरिका में वाशिंगटन डीसी में जो सवाल पूछा गया। वो मुसलमानों के बारे में था। इसलिए भारत आते ही उन्होंने उस सवाल को लेकर लोगों से संपर्क किया। दूसरी बात जो उन्हें पता चला होगी ये कि विपक्ष के नेता एक साथ बैठक कर रहे है। पटना में मिले है। और तमाम विपक्ष नेता अब मोदी को हराने के लिए एक साथ एक जुट होकर मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे है। और इसी पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक बहुत जबरदस्त बयान दिया है। और ये भाषण देखने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वो अपने कार्यकर्ताओं को ये बात नहीं सुना रहे बल्कि विपक्ष के नेताओं को ये बातें सुनाकर सुनाकर वो ये भाषण दे रहे है।
गैरेटी का मतलब होता है एकदम पक्का वादा। भारत में अब तक वादों वाली राजनीति होती रही है आपने देखा होगा चुनाव से पहले हर पार्टी वादा करती है और वादा तोड़ती भी है। लेकिन जब चुनावी वादों वाला यह शब्द काफी घिसपिट गया और लोगों का वादों से विश्वास उठ गया। नेताओं को भी ये बात समझ में आ गया कि अब भारत के जो वोटर्स है वो वादों पर विश्वास नहीं करेंगे तो उन्होंने इसका नाम बदल दिया। अब इस वादे को गारंटी कहा जाने लगा। अब लोग वादा करते है नहीं बोलते, बल्कि वो कहते है कि हम गारंटी देते है।

आज पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान यूनिफ़ार्म सिविल कोड को लेकर कहा हालांकि देश में पहले से ही इसे लेकर चर्चा चल रही थी। वहीं पीएम मोदी के इस बयान के बाद लगता है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यूनिफ़ार्म सिविल कोड अब देश में आ जाएगा। आगे पीएम मोदी ने कहा कि हम मुस्लिम तुष्टीकरण नहीं बल्कि संतुष्टिकरण पर विश्वास करते है। वहीं पीएम मोदी ने भाषण के दौरान बहुत बड़ा हिंट दिया है कि वो भ्रष्टाचार को बहुत बड़ा मुद्दा बनानेवाले है। और विपक्ष के बड़े बड़े नेता आने वाले समय में भ्रष्टाचार के आरोपों से बच नहीं पाएंगे। पीएम मोदी के बयान के बाद यह तो स्पष्ट है कि जल्द ही देश में यूनिफ़ार्म सिविल कोड आ सकता है।

दुनिया के किसी भी देश में जाति और धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून नहीं है। इसीलिए देश के कानून में एक ऐसे यूनिफॉर्म तरीके की जरूरत है जो सभी धर्म, जाति, वर्ग और संप्रदाय को एक ही सिस्‍टम में लेकर आए। इसके साथ ही जब तक देश के संविधान में यह सुविधा या सुधार नहीं होगा, भारत के पंथ निरपेक्ष होने का अर्थ भी स्‍पष्‍ट तौर पर नजर नहीं आएगा।

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