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फूल और प्राकृतिक चीजों से हर्बल गुलाल बना आत्मनिर्भर बनी महिलाएं, होली से पहले बढ़ी मांग

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होली के पर्व में कुछ ही दिन बाकी हैं। ऐसे में अभी से ही होली की खरीददारी को लेकर बाजार गुलजार हो गए हैं। इस बार फूल और प्राकृतिक चीजों से बने हर्बल गुलाल की काफी डिमांड है। बिहार के जमुई जिले की महिलाएं नेचर विलेज से जुड़कर प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल कर हर्बल गुलाल बना रही हैं। इस हर्बल गुलाल को तैयार करने में प्राकृतिक फल – फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

दरअसल, जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत मटिया गांव की महिलाएं हर्बल गुलाल बनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। पालक, गेंदा फूल, गुलाब फूल, चुकंदर, संतरा, अरारोट आदि का इस्तेमाल कर हर्बल गुलाल तैयार किया जाता है।

ट्रेनर गीता भारती ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने के लिए ट्रेनिंग दी गई है। यहां पालक, गेंदा फूल, गुलाब फूल का इस्तेमाल कर गुलाल तैयार किया जा रहा है। पहले ये महिलाएं बीड़ी बनाने का काम करती थीं और उन्हें सिर्फ 50 से 60 रुपए की आमदनी होती थी। इतना ही नहीं, उन्हें बीड़ी के काम से बीमारी भी हो जाती थी। मगर अब हर्बल गुलाल के काम में वे 200 रुपए से अधिक कमा रही हैं।

उन्होंने कहा कि हर्बल गुलाल जितना तैयार किया जा रहा है, वह लगातार बिक रहा है। इस बार मार्केट में इसकी डिमांड काफी अधिक है। यह गुलाल किसी भी रूप से हानिकारक नहीं है।

वहीं, अंचलाधिकारी निर्भय प्रताप सिंह ने कहा कि पिछली बार हमारा फोकस था कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए और सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाए। इस बार 45 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। 20 महिलाएं इस काम में लगी हुई हैं, जिसका काम होली से पहले तक चलेगा।

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बता दें कि हर्बल गुलाल पूरी तरह ऑर्गेनिक और केमिकल रहित है, जो त्वचा एवं आंखों को नुकसान नहीं पहुंचाता। साथ ही इसमें प्रयोग किए जाने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट जैसे जैस्मिन तेल, चंदन और मुल्तानी मिट्टी त्वचा के लिए फायदेमंद हैं। यह हर्बल गुलाल के रूप में महिला समूह की ओर से तैयार अबीर नेचर विलेज मटिया में उपलब्ध है। इस बार 45 क्विंटल हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है।

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