रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार (5 जून)को ब्रिक्स (BRICS) समूह को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि यह संगठन आर्थिक आकार के मामले में पहले ही जी7 (G7) देशों को पीछे छोड़ चुका है और आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ने वाला है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) में संबोधन के दौरान पुतिन ने कहा कि वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और विकास का केंद्र अब पारंपरिक पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं से हटकर ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रहा है।
इंडिया टुडे द्वारा मॉडरेट किए गए इस प्रतिष्ठित मंच पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स देश अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं रहे, बल्कि वे वैश्विक विकास के नए इंजन के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों के आर्थिक आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।
पुतिन ने कहा, “यदि आप पिछले पांच वर्षों के वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों को देखें, तो पाएंगे कि इसकी वार्षिक वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा यानी 49 प्रतिशत ब्रिक्स देशों के खाते में जाता है। वहीं तथाकथित जी7 देशों का योगदान केवल 18 प्रतिशत आंका गया है।”
रूसी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ब्रिक्स के बीच आर्थिक व भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा तेज है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ब्रिक्स समूह की आलोचना कर चुके हैं। पिछले वर्ष ट्रंप ने ब्रिक्स को अमेरिकी डॉलर के लिए संभावित खतरा बताया था और चेतावनी दी थी कि यदि समूह डॉलर के विकल्प को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ता है तो उस पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
ब्रिक्स की स्थापना मूल रूप से ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। हालांकि हाल के वर्षों में इसका विस्तार हुआ है और अब मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इस समूह का हिस्सा बन चुके हैं। सदस्य देशों की बढ़ती संख्या और उनके आर्थिक प्रभाव ने ब्रिक्स को वैश्विक मंच पर अधिक मजबूत स्थिति प्रदान की है।
अपने संबोधन में पुतिन ने जोर देकर कहा कि दुनिया की आर्थिक संरचना में बदलाव अब केवल एक संभावना नहीं बल्कि वास्तविकता बन चुका है। उनके अनुसार नई विकासशील अर्थव्यवस्थाएं और ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक वृद्धि को गति दे रहे हैं, जबकि पारंपरिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत सीमित होती जा रही है।
राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी अनुमान जताया कि आने वाले वर्षों में ब्रिक्स देशों की आर्थिक वृद्धि विकसित देशों की तुलना में कहीं अधिक तेज रहेगी। उनका मानना है कि जनसंख्या, संसाधनों, औद्योगिक क्षमता और उभरते बाजारों के कारण ब्रिक्स देशों के पास दीर्घकालिक विकास की मजबूत संभावनाएं मौजूद हैं।
रूस की ओर से ब्रिक्स के समर्थन को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार, मुद्रा व्यवस्था और भू-राजनीतिक गठबंधनों को लेकर नई बहसें चल रही हैं, पुतिन का यह बयान संकेत देता है कि रूस ब्रिक्स को भविष्य की विश्व अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रिक्स देशों की वर्तमान विकास दर बनी रहती है, तो आने वाले दशक में वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक निर्णयों पर इस समूह का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।
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