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Monday, January 12, 2026
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वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं, अगली सुनवाई 15 मई!

सीजेआई संजीव खन्ना ने स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी।

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सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई हुई। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस पी.वी. संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले को सुनने के बाद अगली सुनवाई 15 मई को निर्धारित की है।

सीजेआई संजीव खन्ना ने स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष दलील दी कि संसद द्वारा व्यापक विचार-विमर्श के बाद पारित इस कानून पर सरकार का पक्ष सुने बिना कोई रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। मेहता ने सुनवाई को अगले सप्ताह तक टालने का आग्रह किया, जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। अगली सुनवाई 15 मई को होगी।

सीजेआई ने कहा, “वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 15 मई को सुनवाई की जाएगी। इस मामले की सुनवाई अगले सीजेआई बी.आर. गवई करेंगे।”

सीजेआई संजीव खन्ना ने सुनवाई के दौरान कहा कि उन्होंने सरकार और याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर सभी दलीलों का अध्ययन कर लिया है। चूंकि उनका कार्यकाल जल्द ही समाप्त होने वाला है, वह इस मामले में कोई आदेश या निर्णय सुरक्षित नहीं रखना चाहते। इसलिए, इस मामले को जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली नई पीठ के समक्ष रखा जाएगा।

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, “हम इस मामले में आदेश सुरक्षित नहीं करना चाहते। इस मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है, और इसे जल्द से जल्द सुना जाना चाहिए।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई में देरी नहीं होनी चाहिए।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को लेकर दायर याचिकाओं में कानून के कुछ प्रावधानों को संवैधानिक रूप से अवैध बताते हुए इन्हें रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कानून संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को और पारदर्शी बनाने के लिए लाया गया है।

यह मामला देश भर में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है और सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इस कानून का भविष्य निर्धारित करेगा। ऐसे में सभी की निगाहें अब 15 मई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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