हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य की विजिलेंस एजेंसियों ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में दो पूर्व बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं। वहीं, IDFC FIRST बैंक ने दावा किया है कि उसने हरियाणा सरकार के विभागों द्वारा दावा की गई 583 करोड़ रुपये की पूरी राशि ब्याज सहित लौटा दी है। मामले की जांच अभी जारी है।
हरियाणा के स्टेट विजिलेंस एवं एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 24 फरवरी की शाम चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार लोगों में बैंक के दो पूर्व कर्मचारी, रिभव ऋषि और अभय सिंगला भी शामिल हैं। अन्य दो आरोपी अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और उसके भाई अभिषेक सिंगला हैं।
पुलिस के अनुसार, स्वाति और उसके भाई ने स्वस्तिक देश प्रोडक्ट्स नाम से एक कंपनी बनाई थी, जिसके जरिए कथित तौर पर सरकारी धन को डायवर्ट किया गया। दोनों निजी व्यक्तियों की एक साझेदारी फर्म भी बताई गई है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आगे की पूछताछ में और खुलासे हो सकते हैं।
फर्जी चेक और भुगतान निर्देशों का इस्तेमाल:
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ शाखा कर्मचारियों ने कथित रूप से फर्जी चेक और नकली भुगतान निर्देशों को मंजूरी दी। आशंका है कि यह घोटाला बाहरी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत से अंजाम दिया गया।
इससे पहले ACB ने हरियाणा सरकार के खातों में गड़बड़ियां पाए जाने के बाद एफआईआर दर्ज की थी। जांच की निगरानी आईपीएस अधिकारी गंगा राम पुनिया कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, विपक्षी नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा और राव नरेंद्र सिंह ने इस मामले की CBI जांच की मांग उठाई है।
मामले की समीक्षा के लिए राज्य स्तर की एक समिति का गठन किया गया है। 16 फरवरी को बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया, लेकिन बताया गया है कि उन्होंने अब तक जांच पैनल को लिखित बयान प्रस्तुत नहीं किए हैं। IDFC FIRST बैंक ने बयान जारी कर कहा है कि उसने हरियाणा सरकार के विभागों द्वारा दावा की गई मूलधन और ब्याज सहित 583 करोड़ रुपये की 100 प्रतिशत राशि चुका दी है। हालांकि, बैंक ने यह भी कहा कि अंतिम राशि मिलान प्रक्रिया के बाद बदल सकती है।
बैंक ने स्पष्ट किया कि वह सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है। बैंक के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है। फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए उसे CRISIL से AAA रेटिंग और लंबी अवधि के लिए CRISIL, ICRA, इंडिया रेटिंग्स और CARE से AA रेटिंग प्राप्त है।
बैंक का कुल ग्राहक कारोबार 5,62,090 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो साल-दर-साल 22.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। ग्रॉस एनपीए 1.69 प्रतिशत और नेट एनपीए 0.53 प्रतिशत रहा। Q3FY26 में पूंजी पर्याप्तता अनुपात 16.22 प्रतिशत और नेट इंटरेस्ट मार्जिन 5.76 प्रतिशत दर्ज किया गया।
जांच अभी जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी धन की हेराफेरी किस स्तर तक और किन-किन लोगों की संलिप्तता से हुई।
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